Karwa Chauth Sargi Time 2026: करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए सरगी की सुबह खास होती है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी खाती हैं और फिर व्रत शुरू करती हैं। सरगी में सास अपनी बहू को फल, मिठाई, मेवे और दूसरी खाने की चीजें देती हैं। अगर आप भी करवा चौथ का व्रत रखने वाली हैं, तो जान लें कि 2026 में सरगी खाने का सही समय क्या है और पूजा का मुहूर्त कब रहेगा।
करवा चौथ पर सरगी कब तक खा सकते हैं, नोट करें सरगी टाइम 2026 (AI Image)
करवा चौथ 2026 में सरगी कब खाएं
इस साल करवा चौथ का व्रत गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। द्रिक पंचांग के अनुसार, दिल्ली में सूर्योदय सुबह 6:31 बजे होगा। इसलिए सरगी सूर्योदय से पहले खा लेनी चाहिए। आप सुबह 4 से 5:30 बजे के बीच सरगी खा सकती हैं, ताकि व्रत शुरू होने से पहले आराम से भोजन कर सकें।
ध्यान रखें कि सरगी खाने का समय सूर्योदय के हिसाब से तय होता है। नोएडा और दिल्ली में समय लगभग समान है, लेकिन दूसरे शहरों में सूर्योदय का समय अलग हो सकता है।
करवा चौथ की सरगी में क्या खाएं
सरगी में ऐसी चीजें शामिल करें, जो पेट भरें और दिनभर ऊर्जा बनाए रखने में मदद करें। इसके लिए आप फल, दूध, मेवे, नारियल, फेनी या हल्का नाश्ता खा सकती हैं। अपनी पसंद और परिवार की परंपरा के अनुसार सरगी की थाली तैयार करें।
सरगी खाते समय पानी भी पर्याप्त मात्रा में पिएं। बहुत ज्यादा नमकीन, तला-भुना या मसालेदार खाना खाने से बचें, क्योंकि इससे प्यास बढ़ सकती है। अगर आपको डायबिटीज या कोई दूसरी स्वास्थ्य समस्या है, तो व्रत रखने के तरीके के बारे में डॉक्टर से सलाह लें।
सरगी खाने के बाद क्या नहीं करना चाहिए
सरगी खाने के बाद पारंपरिक रूप से सूर्योदय से चंद्रोदय तक व्रत रखा जाता है। इस दौरान व्रत रखने वाली महिलाएं भोजन और पानी नहीं लेती हैं। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
करवा चौथ की तैयारी करते समय सरगी की थाली और पूजा का सामान रात में ही तैयार कर लें। इससे सुबह जल्दबाजी नहीं होगी और आप आराम से अपनी परंपरा के अनुसार व्रत शुरू कर सकेंगी।
करवा चौथ 2026 की पूजा का मुहूर्त क्या है
द्रिक पंचांग के अनुसार, 29 अक्टूबर 2026 को करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक रहेगा। इस दौरान महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा करती हैं। व्रत कथा सुनने और करवा से जुड़ी रस्में निभाने का भी महत्व है।
