Kajari Teej Vrat Katha: कजरी तीज क्यों मनाई जाती है? कजरी तीज की व्रत कथा से जानें इसका महत्व

Kajari Teej Vrat Katha In Hindi: कजरी तीज का व्रत पूरी श्रद्धा के साथ किया जाता है। इस व्रत को शादीशुदा महिलाएं और कुंवारी लड़कियां दोनों ही करती हैं। ये व्रत बिना व्रत कथा के अधूरी मानी जाती है। यहां से आप कजरी तीज की पूरी व्रत कथा पढ़ सकते हैं।

Kajari Teej Vrat Katha In Hindi: कजरी तीज का शुभ व्रत भाद्र पद मास की कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। ये तीज सुहाग‍िन मह‍िलाएं रखती हैं और चांद को अर्घ्‍य देने के बाद व्रत का पारण क‍िया जाता है। कजली तीज, बूढ़ी तीज या सतूड़ी तीज भी कजरी तीज के ही नाम हैं। 2025 में कजरी तीज का व्रत आज यानी 12 अगस्‍त को रखा जा रहा है। इस व्रत के पूर्ण लाभ के ल‍िए कथा का पाठ भी क‍िया जाता है। मान्‍यता है क‍ि इस कथा के पाठ से तीज माता का आशीर्वाद मिलता है।

कजरी तीज व्रत कथा (photo source: canva)

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कजली तीज की पौराणिक व्रत कथा के अनुसार एक गांव में एक गरीब ब्राह्मण रहता था। भाद्रपद महीने की कजली तीज आई। ब्राह्मणी ने तीज माता का व्रत रखा। ब्राह्मण से कहा आज मेरा तीज माता का व्रत है। कही से चने का सातु लेकर आओ। ब्राह्मण बोला, सातु कहां से लाऊं। तो ब्राह्मणी ने कहा कि चाहे चोरी करो चाहे डाका डालो। लेकिन मेरे लिए सातु लेकर आओ।

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