आखिर जगन्नाथ पुरी रथयात्रा के बाद रथ के पहियों का क्या होता है? जानिए कीमत, नियम और पूरी प्रक्रिया

Jagannath Puri Rath Yatra: थ के जिन हिस्सों का धार्मिक उपयोग समाप्त हो जाता है, उन्हें मंदिर प्रशासन (SJTA) एक निर्धारित और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत श्रद्धालुओं, मठों और संस्थाओं के लिए उपलब्ध कराता है।

Jagannath Puri Rath Yatra: ओडिशा के पुरी में आज विश्वप्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथयात्रा की शुरुआत हो गई है। भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथों में सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर पहुंचेंगे। यहां तीनों देवता सात दिनों तक रहेंगे। इसके बाद 24 जुलाई को बहुड़ा यात्रा के जरिए वे मुख्य मंदिर लौटेंगे। परंपरा के अनुसार भगवान दो दिन तक रथों पर ही विराजेंगे और 27 जुलाई को दोबारा श्रीमंदिर में प्रवेश करेंगे। इसके कुछ समय बाद मंदिर प्रशासन रथों को खोलने की प्रक्रिया शुरू करेगा।

Jagannath Rathyatra 2026, Puri Rath Yatra

जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा के बाद 15 दिन में खुल कर अलग होता है रथ (AI Generated Image)

बहुत से लोगों के मन में सवाल आता है कि इतने विशाल रथों और उनके पहियों का आखिर क्या होता है? क्या उन्हें हमेशा के लिए सुरक्षित रख लिया जाता है या फिर किसी और काम में इस्तेमाल किया जाता है? दिलचस्प बात यह है कि रथयात्रा खत्म होने के बाद इन रथों के साथ जो होता है, वह भी उतना ही अनूठा है जितनी स्वयं यह परंपरा।

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