जगन्नाथ रथ यात्रा का पर्व आते ही मंदिरों, घरों और भजन मंडलियों में भगवान जगन्नाथ के भजनों की मधुर धुन गूंजने लगती है। भजन केवल संगीत नहीं, बल्कि प्रभु के प्रति प्रेम, समर्पण और अटूट विश्वास का माध्यम हैं। रथ यात्रा के दौरान "जय जगन्नाथ" का जयघोष हर श्रद्धालु के हृदय में नई ऊर्जा भर देता है। जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 के इस पावन अवसर पर आप भी जय जगन्नाथ के नाम के मधुर भजन गा सकते हैं। देखें रथ यात्रा स्पेशल जगन्नाथ भजन, ओडिया भजन, जय जगन्नाथ गान, स्त्रोत, भजन लिरिक्स।
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Jagannath chakanayan lyrics in hindi
जगन्नाथ चक्का नैन नीलाचल वारे
जगन्नाथ, जगन्नाथ, चका नैन, चका नैन
नीलाचल वारे, तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले
तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले
मेरी ये नैया है अब तो तेरे हवाले
तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले,
जगन्नाथ...
तुझे छोड़ जाऊं मैं अब किस किसके द्वारे,
तुझे छोड़ जाऊं मैं अब किस किसके द्वारे,
नीलाचल वारे, तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले
तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले,
जगन्नाथ...
जगन्नाथ स्वामी मेरे नैन के तारे,
मेरे सारे काज स्वामी आप ही संवारे,
तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले,
नीलाचल वारे, तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले,
जगन्नाथ...
शरण तेरी पड़ा रहूं दास बनाले,
तेरी ही सेवा करूं जो चाहे कराले,
तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले,
नीलाचल वारे, तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले,
जगन्नाथ...
Nayan Path Gami Jagannath Swami lyrics in hindi
कदाचित् कालिन्दी तट विपिन सङ्गीत तरलो
मुदाभीरी नारी वदन कमला स्वाद मधुपः
रमा शम्भु ब्रह्मामरपति गणेशार्चित पदो
जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥१॥
भुजे सव्ये वेणुं शिरसि शिखिपिच्छं कटितटे
दुकूलं नेत्रान्ते सहचर-कटाक्षं विदधते ।
सदा श्रीमद्-वृन्दावन-वसति-लीला-परिचयो
जगन्नाथः स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे ॥२॥
महाम्भोधेस्तीरे कनक रुचिरे नील शिखरे
वसन् प्रासादान्तः सहज बलभद्रेण बलिना ।
सुभद्रा मध्यस्थः सकलसुर सेवावसरदो
जगन्नाथः स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे ॥३॥
कृपा पारावारः सजल जलद श्रेणिरुचिरो
रमा वाणी रामः स्फुरद् अमल पङ्केरुहमुखः ।
सुरेन्द्रैर् आराध्यः श्रुतिगण शिखा गीत चरितो
जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥४॥
रथारूढो गच्छन् पथि मिलित भूदेव पटलैः
स्तुति प्रादुर्भावम् प्रतिपदमुपाकर्ण्य सदयः ।
दया सिन्धुर्बन्धुः सकल जगतां सिन्धु सुतया
जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥५॥
परंब्रह्मापीड़ः कुवलय-दलोत्फुल्ल-नयनो
निवासी नीलाद्रौ निहित-चरणोऽनन्त-शिरसि ।
रसानन्दी राधा-सरस-वपुरालिङ्गन-सुखो
जगन्नाथः स्वामी नयन-पथगामी भवतु मे ॥६॥
न वै याचे राज्यं न च कनक माणिक्य विभवं
न याचेऽहं रम्यां सकल जन काम्यां वरवधूम् ।
सदा काले काले प्रमथ पतिना गीतचरितो
जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥७॥
हर त्वं संसारं द्रुततरम् असारं सुरपते
हर त्वं पापानां विततिम् अपरां यादवपते ।
अहो दीनेऽनाथे निहित चरणो निश्चितमिदं
जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥८॥
जगन्नाथाष्टकं पुन्यं यः पठेत् प्रयतः शुचिः ।
सर्वपाप विशुद्धात्मा विष्णुलोकं स गच्छति ॥९॥
Jagannath Odia Bhajan
जगन्नाथ, श्री जगन्नाथ
लाक्षे शाळग्राम बिंचा बेढिकु छाडि,
रथारूढ हेउचि मो कळा श्रीहरी।
(जगन्नाथ, श्री जगन्नाथ)
लाक्षे शाळग्राम बिंचा बेढिकु छाडि,
रथारूढ हेउचि मो कळा श्रीहरी। [1]
मेंटीजिबा ए आखिरु अनेक शोष,
सरधा बालिरे देखि श्रीनन्दिघोष।
जय जगन्नाथ कहि, दुई हाथ टेकिदेई,
मन प्राण मिसीजाउ महाजात्रारे...
मो जगा काळिया रे, मो जगा काळिया रे
मो जगा काळिया रे, काळिया रे...
(महाप्रभु श्री जगन्नाथ की जय)
बालि जउठि बिभूति हुए,
भाव थिले भात हुए महाप्रसाद।
पाणि जउठि टंक तोराणि,
पबणे भासिआसे गीत गोबिंद।
(जगन्नाथ...)
ओडिआ जाति गरब करे,
आनंदरे कहे से मो इष्ट देवता।
दारू हेलेबि बुझुचु दुःख,
नकहि बि जाणिरु सकळ कथा।
थरे हातकु बढेइ, मोते ने रे कोलेइ,
लोडा नाहिं आउ किछि माया संसाररे...
मो जगा काळिया रे, मो जगा काळिया रे
मो जगा काळिया रे, काळिया रे...
