Phalgun Purnima 2023: हिंदू कैलेंडर में फाल्गुन का महीना सबसे आखिरी महीना होता है। इस आखिरी महीने में पड़ने वाली पूर्णिमा को फाल्गुन पूर्णिमा कहा जाता है। इसी दिन होलिका दहन किया जाता है। इस त्योहार पर सभी लोग अपने पुराने गिले-शिकबे को भुलाकर एक दूसरे से खुशियां बांटते हैं। इसलिए होली के त्योहार का हिन्दू धर्म में काफी महत्व होता है। इस दिन काफी महत्वपूर्ण कार्य होते हैं। इस बार फाल्गुन पूर्णिमा 6 मार्च को शाम 4 बजकर 17 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन 7 मार्च को शाम 6 बजकर 9 मिनट पर पूर्णिमा समाप्त होगी। इसलिए उदिया तिथि में यानि 7 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा।
फाल्गुन पूर्णिमा का है विशेष महत्व
फाल्गुन पूर्णिमा पर पूजा का महत्व
फाल्गुन पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है और इस दिन कई लोग व्रत भी रखते हैं। इस दिन सुबह उठकर स्नान करके साफ कपड़े पहनकर विष्णु भगवान के नरसिंह रूप की पूजा की जाती है। इस पूजा को करते समय अपने मुख को उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखना चहिए। फाल्गुन पूर्णिमा वाले दिन व्रत रखकर पूरे दिन फलाहार करें। होलिका दहन के दिन सुबह बदन पर उबटन लगाकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद गाय के गोबर से होलिका बनाकर उसकी पूजा करें और फिर होलिका दहन की तैयारी करनी चाहिए। होलिका दहन करने के बाद अग्नि की 5 या 7 बार परिक्रमा करनी चाहिए। इसके बाद बड़ों का आर्शीवाद लेकर चेहरे पर गुलाल लगाकर सभी से गले मिलना चाहिए।
फाल्गुन पूर्णिमा को क्या करें और क्या न करें
फाल्गुन पूर्णिमा के दिन आप श्री सूक्त का पाठ, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ और कनकधारा स्त्रोत करते हैं, तो इससे आपका मनचाहा कार्य पूरा हो सकता है। यदि आप आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं, तो इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ माता लक्ष्मी की पूजा भी कर सकते हैं। वहीं, अगर आपकी कुंडली में चंद्र दोष है, तो पूर्णिमा की रात में चंद्र देव को दूध चढ़ाएं और रुद्राक्ष की माला के साथ ‘ॐ सों सोमाय नमः’ का जाप करें। इसके अलावा, अगर आपके पितर नाराज हैं, तो उन्हें खुश करने के लिए आप फाल्गुन पूर्णिमा के दिन पिंडदान कर सकते हैं। होलिका दहन वाले दिन लोगों को पैसे का लेन-देन नहीं करना चाहिए। होलिका दहन के समय काला या फिर सफेद वस्त्र धारण करने से बचना चाहिए। इन दोनों रंगों पर नकारात्मकता का प्रभाव जल्द हो सकता है।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
