Holika Dahan Time 3 March 2026, Kya Aaj Holika Dahan Hoga: होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा की संध्या को शुभ मुहूर्त में किया जाता है और ये बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन साफ-सुथरे स्थान पर लकड़ी और सूखी लकड़ी से होलिका का ढांचा तैयार किया जाता है, जिसे फूल, हल्दी, रोली, अक्षत, गुड़ और नारियल से सजाया जाता है। स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनने के बाद भगवान विष्णु, भक्त प्रह्लाद और अग्नि देव की पूजा की जाती है, और मंत्रों का जप करते हुए होलिका में अग्नि प्रज्वलित की जाती है। परिवार और शुभचिंतकों के साथ परिक्रमा करते हुए नारियल या गेहूं की बालियां अग्नि में अर्पित की जाती हैं। अब घर में गंगाजल छिड़ककर, दीपक जलाकर और सकारात्मक ऊर्जा ग्रहण करते हुए पूजा समाप्त की जाती है, जिससे घर और परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है। ऐसे में अब सवाल ये है कि क्या आज यानी 3 मार्च के दिन होलिका दहन होगा? आज होलिका दहन मनाने का समय क्या है? यहां देखें सभी सवालों से जवाब।
3 मार्च 2026 को होलिका दहन कितने बजे होगा (pc: canva)
आज होलिका दहन होगा क्या?
होलिका दहन के अगले दिन ही होली खेली जाती है, लेकिन 3 मार्च को चंद्र ग्रहण होने की वजह से 2 मार्च के दिन ही होलिका दहन मनाया गया। हालांकि, 3 मार्च यानी आज भी चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद होलिका दहन मनाया जा सकता है। फिर अगले दिन 4 मार्च को रंग खेला जाएगा।
3 मार्च को होलिका दहन कितने बजे होगा?
आज, 3 मार्च 2026 के दिन चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शाम के 6 बजकर 47 मिनट कर रहने वाला है। यानी की 7 बजे के बाद आप होलिका दहन कर सकते हैं। आज शाम में 6:48PM से लेकर 8:50PM तक होलिका दहन का समय एकदम शुभ है।
होलिका दहन के मंत्र-
श्री विष्णु मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः॥
नृसिंह भगवान मंत्र (प्रह्लाद की रक्षा के लिए)
उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।
नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥
भक्त प्रह्लाद स्मरण मंत्र
श्री प्रह्लादाय विद्महे
भक्तराजाय धीमहि।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
होलिका दहन मंत्र
अहकूटा भयत्रस्ता कृता त्वं होलि बालिशैः।
अतस्त्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम्॥
अग्नि देव मंत्र
ॐ अग्नये नमः॥
होलिका दहन के समय मंत्र जाप की विधि-
होलिका दहन से पहले स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनें। लकड़ी की अग्नि प्रज्वलित होने पर जल, रोली, अक्षत अर्पित करें। परिवार सहित परिक्रमा करते हुए मंत्रों का 11 या 21 बार जप करें। अंत में भगवान से सुख-समृद्धि और रक्षा की प्रार्थना करें। श्रद्धा और भक्ति से किया गया जप नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
होलिका दहन कथा-
प्राचीन समय में हिरण्यकश्यप नाम का एक शक्तिशाली असुर था। उसने कठोर तपस्या करके ब्रह्माजी से ऐसा वरदान लिया था कि उसे न कोई मनुष्य मार सके, न कोई पशु। वह न घर के अंदर मरे, न बाहर, न दिन में, न रात में और न ही किसी अस्त्र-शस्त्र से उसकी मृत्यु हो सके। इस वरदान के कारण वह बहुत अहंकारी हो गया और खुद को भगवान कहने लगा। उसने अपने राज्य में भगवान विष्णु की पूजा पर रोक लगा दी। हिरण्यकश्यप का बेटा प्रह्लाद बचपन से ही भगवान विष्णु का भक्त था। वह हर समय भगवान का नाम जपता रहता था। पिता ने उसे भक्ति से दूर करने के लिए कई कठोर प्रयास किए। उसे ज़हरीले साँपों के बीच डाला गया, हाथियों से कुचलवाने की कोशिश की गई, ऊँचे पर्वत से गिरवाया गया और समुद्र में भी फेंक दिया गया। लेकिन हर बार भगवान विष्णु ने अपने भक्त की रक्षा की। जब सभी प्रयास असफल हो गए, तो हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को बुलाया। होलिका को अग्नि से न जलने का वरदान मिला था। उसने प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने का निर्णय लिया। प्रह्लाद भगवान का नाम जपता रहा और नहीं डरा। लेकिन होलिका ने अपने वरदान का गलत उपयोग किया, इसलिए वह आग में जल गई। भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गया। इसी घटना की याद में हर साल होलिका दहन मनाई जाती है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। अगले दिन रंगों का त्योहार होली मनाई जाती है, जिसे रंगोत्सव भी कहा जाता है।
होलिका दहन की आरती-
ॐ जय होलिका माता मैया जय होलिका माता
जो जन तुझको पूजे सुख सारे पाता
ॐ जय होलिका माता
महाऋषि कश्यप की पुत्री तुम माता
मैया पुत्री तुम माता हिरण्य कश्यप भ्राता
ॐ जय होलिका माता
शिव भक्ति से तुमने ऐसा वर पाया
मैया ऐसा वर पाया अग्नि जला न पाए
अग्नि जला न पाए तेरी ये काया
ॐ जय होलिका माता
वरदानी ये दुशाला शीश पे जब ओढ़े
मैया शीश पे जब ओढ़े शिवजी की कृपा से
शिवजी की कृपा से अग्नि भी मुख मोड
ॐ जय होलिका माता
ऋषि श्राप के बंधन सारे सत्य हुए
मैया सारे सत्य हुए अग्नि बिच में जल के
अग्नि बिच में जल के दोषी वो भस्म हुए
ॐ जय होलिका माता
पान सुपारी नारियल जो तुझे दान करे
मैया जो तुझे दान करे धन वैभव सुख सारे
धन वैभव सुख सारे तू प्रदान करे
ॐ जय होलिका माता
गेंहू चने की बाली चढ़े सरसो के फूल
मैया चढ़े सरसो के फूल उस जन के दुःख हारती
उस जन के दुःख हारती ग्रह रहे अनुकूल
ॐ जय होलिका माता
होली दहन के समय जो परिक्रमा करते
मैया परिक्रमा करते होलिका माँ की कृपा से
होलिका माँ की कृपा से काज सफल होते
ॐ जय होलिका माता
बड़ गुल्ले गोबर के होली में दहन करे
मैया होली में दहन करे अन्न धन से भंडारे
अन्न धन से भंडारे होलिका मात भरे
ॐ जय होलिका माता
होलिका माई की आरती जो भी जन गावे
मैया जो भी जन गावे सुख संतान की खुशियां
सुख संतान की खुशियां मैया से पाए
ॐ जय होलिका माता
ॐ जय होलिका माता मैया जय होलिका माता
वैरागी माँ तेरे नित नित गुण गाता
ॐ जय होलिका माता
ॐ जय होलिका माता मैया जय होलिका माता
जो जन तुझको पूजे सुख सारे पाता
ॐ जय होलिका माता
