Guru Purnima 2026: आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाने वाली गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का ऐसा पावन पर्व है, जो गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता का प्रतीक है। सनातन परंपरा में गुरु को अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान का प्रकाश देने वाला माना गया है। यही कारण है कि इस दिन गुरु की पूजा, सेवा और आशीर्वाद प्राप्त करने का विशेष महत्व बताया गया है। हरिद्वार में गुरु पूर्णिमा का उत्सव अलग ही आध्यात्मिक आभा बिखेरता है। मान्यता है कि इस दिन मां गंगा में श्रद्धापूर्वक स्नान, दान-पुण्य और गुरु वंदना करने से जीवन के कष्ट कम होते हैं और व्यक्ति आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होता है। यदि आप इस बार गुरु पूर्णिमा के दिन हर की पौड़ी में स्नान (Guru Purnima Ganga Snan) की योजना बना रहे हैं, तो आपको स्नान के शुभ मुहूर्त के बारे में जान लेना चाहिए।
गुरु पूर्णिमा पर स्नान के मुहूर्त
क्यों खास है ब्रह्म मुहूर्त का स्नान
गुरु पूर्णिमा पर ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह समय साधना, ध्यान और ईश्वर आराधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। ऐसा विश्वास है कि इस अवधि में गंगा स्नान करने से मन और आत्मा दोनों की शुद्धि होती है और पुण्य फल की प्राप्ति होती है। सूर्योदय से पहले गंगा के निर्मल जल में डुबकी लगाने के बाद भगवान विष्णु, भगवान शिव और अपने गुरु का स्मरण करने से जीवन में पुण्य का संचय होता है। इसके साथ ही गुरु मंत्र का जाप करने से साधना का फल कई गुना मिलता है।
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हर की पौड़ी पर कहां स्नान करें
भगवान शिव की नगरी हरिद्वार की पहचान हर की पौड़ी से है। यहां स्थित ब्रह्म कुंड को सबसे पवित्र घाटों में गिना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस स्थान पर स्नान करने से अनेक जन्मों के पापों का क्षय होता है और मनुष्य को आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। गुरु पूर्णिमा के दिन यहां हजारों श्रद्धालु गंगा में आस्था की डुबकी लगाते हैं। मंत्रोच्चार, आरती और घंटियों की मधुर ध्वनि पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देती है। पहली बार यहां आकर स्नान करने वाले श्रृद्धालुओं के लिए यह एक अविस्मरणीय पल होता है।
गुरु पूर्णिमा पर स्नान का मुहूर्त
गुरु पूर्णिमा 2026 का पावन पर्व 29 जुलाई बुधवार के दिन मनाया जाएगा। इस अवसर पर स्नान का सबसे अच्छा समय ब्रह्म मुहूर्त ही रहेगा। धार्मिक मान्यता है कि प्रातः 4:00 बजे से 5:00 बजे के बीच ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होगी। वहीं स्नान, दान और पूजा के लिए सुबह 5:40 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक का समय भी अत्यंत शुभ माना गया है।
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गुरु पूर्णिमा पर क्या करना चाहिए?
- गुरु या अपने शिक्षकों का सम्मान कर उनका आशीर्वाद लें।
- गंगा स्नान के बाद दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सहायता करें।
- गुरु मंत्र, गायत्री मंत्र या भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
- धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करें और सत्संग में भाग लें।
- माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।
गुरु पूर्णिमा का सामाजिक संदेश
गुरु पूर्णिमा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है। यह पर्व समाज में ज्ञान, संस्कार, अनुशासन और सद्भाव की भावना को भी मजबूत करता है। गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर रही है, जिसने पीढ़ी-दर-पीढ़ी ज्ञान और मूल्यों का संचार किया है। आज के आधुनिक दौर में भी यह पर्व हमें याद दिलाता है कि जीवन में सही दिशा, प्रेरणा और सफलता के लिए एक योग्य गुरु का मार्गदर्शन कितना महत्वपूर्ण है।
