Guru Nanak Dev Ji Ki Aarti: गुरु नानक देव जी सिखों के पहले गुरु थे। पंचांग अनुसार इनका जन्म कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुआ था। इसलिए ही इस पूर्णिमा को हर साल गुरु नानक जयंती मनाई जाती है। सिख धर्म के लोगों के लिए ये दिन बेहद ही खास होता है। इस दिन गुरुद्वारों में भजन, कीर्तनों का आयोजन होता है। इस दिन भक्त गुरुग्रंथ साहिब का पाठ करते हैं। गुरु नानक देव जी की जयंती को प्रकाश पर्व और गुरु पर्व के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन गुरु नानक देव जी की आरती जरूर करनी चाहिए।
Guru Nanak Dev Ji Ki Aarti
गुरु नानक देव जी की आरती (Guru Nanak Dev Ji Ki Aarti)
धनासरी महला १ आरती ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
गगन मै थालु रवि चंदु दीपक
बने तारिका मंडल जनक मोती ॥
धूपु मल आनलो पवणु चवरो करे
सगल बनराइ फूलंत जोती ॥
कैसी आरती होइ भव खंडना तेरी आरती ॥
अनहता सबद वाजंत भेरी रहाउ ॥
सहस तव नैन नन नैन है तोहि कउ
सहस मूरति नना एक तोही ॥
सहस पद बिमल नन एक पद गंध बिनु
सहस तव गंध इव चलत मोही ॥
सभ महि जोति जोति है सोइ ॥
तिस कै चानणि सभ महि चानणु होइ ॥
गुर साखी जोति परगटु होइ ॥
जो तिसु भावै सु आरती होइ ॥
हरि चरण कमल मकरंद लोभित मनो
अनदिनो मोहि आही पिआसा ॥
कृपा जलु देहि नानक सारिंग
कउ होइ जा ते तेरै नामि वासा ॥
गगन मै थालु, रवि चंदु दीपक बने,
तारका मंडल, जनक मोती।
धूपु मलआनलो, पवण चवरो करे,
सगल बनराइ फुलन्त जोति॥
कैसी आरती होइ॥
भवखंडना तेरी आरती॥
अनहत सबद बाजंत भेरी॥
