गौरी हब्बा में महिलाओं के बीच ‘बागिना’ देने की परंपरा क्या है? जानें इसका धार्मिक और सामाजिक महत्व

Gauri Habba: गौरी हब्बा में ‘बागिना’ देने की परंपरा महिलाओं के बीच स्नेह, सौभाग्य और समृद्धि की मंगलकामना से जुड़ी है। इसमें हल्दी-कुमकुम, नारियल, फल, श्रृंगार सामग्री और घरेलू उपयोग की शुभ वस्तुएं शामिल की जाती हैं।

Gauri Habba: दक्षिण भारत के प्रमुख पर्वों में शामिल गौरी हब्बा केवल मां गौरी की पूजा का अवसर नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के आपसी स्नेह, सौभाग्य और पारिवारिक समृद्धि से जुड़ी खूबसूरत लोकपरंपराओं का भी पर्व है। कर्नाटक समेत दक्षिण भारत के कई हिस्सों में इस दिन महिलाएं विशेष रूप से सज-धजकर गौरी माता की पूजा करती हैं और एक-दूसरे के साथ पूजा सामग्री व उपहार साझा करती हैं। इन्हीं परंपराओं में एक खास रस्म है ‘बागिना’ देना। आइए विस्तार से समझते हैं गौरी हब्बा में दिए जाने वाले बागिना (Gauri Habba Bagina) का धार्मिक और सामाजिक महत्व...

Gauri Habba

गौरी हब्बा में बागिना देने की परंपरा

क्या होता है ‘बागिना’?

गौरी हब्बा के अवसर पर महिलाएं एक-दूसरे को ‘बागिना’ देती हैं। इसे सामान्य उपहार की तरह नहीं देखा जाता, बल्कि यह सौभाग्य, समृद्धि, सुख और मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है। बागिना में आमतौर पर दैनिक जीवन में उपयोग आने वाली चीजें, श्रृंगार सामग्री, अनाज, फल, नारियल, हल्दी-कुमकुम और अन्य शुभ वस्तुएं शामिल की जाती हैं।

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