Gangaur Aarti Lyrics (गणगौर पूजा आरती लिरिक्स): आज गणगौर पूजा का पावन पर्व है जो हर साल चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। मान्यता है इस व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब ये व्रत पति से छिपाकर रखा जाए। इस व्रत में गणगौर की विधि विधान पूजा करने के बाद उनकी आरती करना बिल्कुल भी न भूलें। यहां गणगौर से जुड़ी आरतियों के लिरिक्स आपको बताएंगे।
Gangaur Aarti Lyrics
गणगौर की आरती (Gangaur Aarti Lyrics)
आरती कीजिए गणगौर ईसर जी की
गौरी शंकर शिव पार्वती की -2
देसी घी को दीप जलायो
तोड़ तोड़ फूलडा हार बनायो
लाला फूला की थाने हार पहनायो
आरती कीजिए.........
महिमा थारी सब कोई गावे
खीर ढोकला को भोग लगावे
भंडार उसके भर देते हो
आरती कीजिए.......
ईसर म्हारा छैल छबीला
गोरा म्हारी रूप की रानी
सुंदर जोड़ी पर वारी वारी जाऊं
आरती कीजिए..............
जो कोई आपकी शरण में आवे
सर्व सुहाग परम पथ पावे
आरती कीजिए..........
गणगौर पूजा की दूसरी आरती (Gangaur Aarti - 2)
म्हारी डूंगर चढती सी बेलन जी
म्हारी मालण फुलडा से लाय |
सूरज जी थाको आरत्यों जी
चन्द्रमा जी थाको आरत्यो जी |
ब्रह्मा जी थाको आरत्यो जी
ईसर जी थाको आरत्यो जी
थाका आरतिया में आदर मेलु पादर मेलू
पान की पचास मेलू
पीली पीली मोहरा मेलू ,
रुपया मेलू डेड सौ सुपारी मेलू ,
मोतीडा रा आखा मेलू
राजा जी रो सुवो मेलू ,
राणी जी री कोयल मेलू
करो न भाया की बहना आरत्यो जी
करो न सायब की गौरी आरत्यो जी
गणगौर पूजा की आरती- 3 (Gangaur Puja Aarti - 3)
नीव ढलती बेलड़ी जी |
मालन फुलड़ा सा ल्याय, ईसरदास थारो कोटडया जी |
मालन फुलड़ा सा ल्याय, कानीराम थारो आरती जी ||
आरतडदात धाम सुपारी लागी डोड़ा स जी |
डोड़ा राज कोट चिणाए, झीलो म्हारी चूनड़ी जी ||
गायां जाई छ ठाणम जी, बहुवां जाई छ साल, झीलो म्हारी चूनड़ी जी |
गायां जाया बाछड़ा जी, बहूवां जाया छ पूत, झीलो म्हारी चूनड़ी जी ||
गायां खाया खोपरा जी बहूवां खाई छ सूट, झीलो म्हारी चूनड़ी जी |
गायां क गल घूघरा जी बहूवां कागल हार, झीलो म्हारी चूनड़ी जी ||
गोरल जायो द पूत जी कुण खिलायगी जी, खिलासी रोवां ननद झाबर क पालण जी |
आँख मोड़ नाक मोड़ कड़ मोड़ घूमर घाल,बाड़ी न रुन्दल जी ||
बाड़ी म लाल किवाड़, झीली म्हारी चूनड़ी जी, आवगा ब्रह्मदासजी रा पूत पाजोव थारी मन राली जी ||
श्री पार्वती माता की आरती (Mata Parvati Ki Aarti Lyrics)
जय पार्वती माताजय पार्वती माता।
ब्रह्म सनातन देवीशुभ फल की दाता॥
जय पार्वती माता
अरिकुल पद्म विनाशिनिजय सेवक त्राता।
जग जीवन जगदम्बा,हरिहर गुण गाता॥
जय पार्वती माता
सिंह को वाहन साजे,कुण्डल हैं साथा।
देव वधू जस गावत,नृत्य करत ताथा॥
जय पार्वती माता
सतयुग रूपशील अतिसुन्दर,नाम सती कहलाता।
हेमांचल घर जन्मी,सखियन संग राता॥
जय पार्वती माता
शुम्भ निशुम्भ विदारे,हेमांचल स्थाता।
सहस्र भुजा तनु धरि के,चक्र लियो हाथा॥
जय पार्वती माता
सृष्टि रूप तुही हैजननी शिवसंग रंगराता।
नन्दी भृंगी बीन लहीसारा जग मदमाता॥
जय पार्वती माता
देवन अरज करतहम चित को लाता।
गावत दे दे ताली,मन में रंगराता॥
जय पार्वती माता
श्री प्रताप आरती मैया की,जो कोई गाता।
सदासुखी नित रहतासुख सम्पत्ति पाता॥
जय पार्वती माता
