Ganga Dussehra Vrat Katha: गंगा दशहरा की व्रत कथा, पढ़ें गंगा के धरती पर अवतरण की पौराणिक कहानी व महत्व

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated May 30, 2023, 06:27 AM IST

Ganga Dussehra 2023 Vrat Katha in Hindi: गंगा दशहरा हिंदू धर्म में मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्योहार है, जो ज्येष्ठ शुक्ल दशमी पर मनाया जाता है। इस बार यह पर्व आज यानी 30 मई को है। क्या आप इस पर्व को मनाए जाने की वजह जानते हैं? अगर नहीं तो यहां जानिए गंगा दशहरा से जुड़ी पौराणिक कथा हिंदी में।

Ganga Dussehra 2023 Vrat Katha in Hindi: गंगा दशहरा देशभर में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। गंगा मां को समर्पित यह खास दिन उनके धरती पर अवतरण का दिन माना जाता है। पंचांग के अनुसार, गंगा दशहरा प्रतिवर्ष ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को सेलिब्रेट किया जाता है, जो कि आज यानी 30 मई, 2023 को है। हिंदू धर्म में गंगा मां को बेहद पवित्र, मोक्षदायनी और पतित पावनी कहा गया है। ऐसे में गंगा दशहरा के अवसर पर गंगा मां की आराधना का भी विशेष महत्व होता है। कहते हैं इस दिन मां गंगा की विधिवत पूजा करने से भक्तों को मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। अगर आप गंगा दशहरा में मां गंगा की अपार कृपा के लिए व्रत रखने की सोच रहे, तो यहां देखिए गंगा दशहरा की पौराणिक कथा।

Ganga Dussehra Vrat Katha in Hindi, गंगा दशहरा की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में भागीरथ नमक राजा अयोध्या में रहते थे। उन्हें भगवान श्रीराम का पूर्वज माना जाता है। एक बार राजा भागीरथ को अपने पूर्वजों की तर्पण करने के लिए गंगाजल की आवश्यकता हुई। उस समय मां गंगा सिर्फ स्वर्ग में ही बहती थी। तब मां गंगा को धरती पर लाने के लिए राजा भागीरथ ने कई वर्षों तक कठोर तपस्या की। लेकिन फिर भी उन्हें सफलता नहीं मिली। चिंतित हुए राजा भागीरथ तपस्या के लिए हिमालय पर चले गए और वहां जाकर वह फिर से कठोर तप में लीन हो गए। उन की कठोर तपस्या को देख मां गंगा बेहद प्रसन्न हुईं और उन्हें आशीर्वाद देने के लिए भागीरथ के सामने प्रकट हो गईं। मां गंगा को अपने समक्ष देखकर राजा भागीरथ बहुत प्रसन्न हुए। फिर, उन्होंने मां गंगा से धरती पर आने की आग्रह की।

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