Ganesh Ji Ki Katha (गणेश जी की कहानी): 22 अगस्त को कजरी तीज, संकष्टी चतुर्थी, बहुला चतुर्थी (Bahula Chauth Katha) और सातुड़ी तीज (Satudi Teej Katha) मनाई जाएगी। कजरी तीज व्रत महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं तो भाद्रपद संकष्टी चतुर्थी का व्रत मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए रखा जाता है। इन दोनों ही व्रतों का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। अगर आप चाहते हैं कि इन व्रतों का आपको पूर्ण फल प्राप्त हो तो इस दिन गणेश जी की कथा जरूर पढ़ें। मान्यता अनुसार गणेश जी की कहानी (Ganesh Ji Ki Kahani) पढ़ने से हर पूजा पूरी हो जाती है।
Ganesh Ji Ki Kahani, Kajari Teej Katha
गणेश जी की कथा (Ganesh Ji Ki Kahani)
गणेश जी कहानी इस प्रकार है...एक नगर में एक बुढ़िया रहती थी जो रोज मिट्टी के गणेश जी बनाकर उसकी पूजा किया करती थी। मिट्टी की प्रतिमा होने की वजह से वह रोज गल जाती थी। एक दिन उसके घर के पास एक सेठ जी का मकान बन रहा था। वो मकान बनाने वाले मिस्त्री के पास जाकर बोली कि मेरे लिए पत्थर का गणेश प्रतिमा बना दो। लेकिन मिस्त्री ने कहा कि जितने में हम तेरी मूर्ति बनाएंगे उतने में अपनी दीवार ना बना लेंगे। बुढ़िया ने कहा कि भगवान करे तुम्हारी दीवार टेढ़ी हो जाए। ऐसा कहते ही दीवार टेढ़ी हो गई।
इसके बाद मकान बनाने वाले कारीगरों को दीवार बनाते-बनाते शाम हो गई। लेकिन जितनी बार वो दीवार बनाए उतनी बार वो टेढ़ी हो जाए। इसके बाद सेठ जी आ गए। उन्होंंने देखा कि दीवार बनी ही नहीं है। उन्होंंने कारीगरोंं से बोला कि आज कोई काम नहीं किया क्यों? तब एक मिस्त्री ने बोला कि एक बुढ़िया आई थी। जो पत्थर की गणेश भगवान की प्रतिमा बनाने को कह रही थी। हमने मना कर दिया। जिस पर उसने कहा कि तुम्हारी दीवार टेढ़ी हो जाए। बस तभी से ये दीवार सीधी नहीं बन रही है। सेठ जी ने बुढ़िया तो बुलवाया कहा कि माई हम तेरे लिए सोने की गणेश प्रतिमा ला देंगे बस तू हमारी दीवार सीधी कर दे। जैसे ही सेठ जी ने बुढ़िया को सोने की प्रतिमा दी उनकी दीवार सीधी हो गई। हे विनायक जी जैसे आपने सेठ जी की दीवार सीधी की वैसे ही सबकी करना।
