Sankashti Chaturthi Vrat Katha In Hindi: गणाधिप संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा पढ़ने से हर संकट होगा दूर

Ganadhipa Sankashti Chaturthi Vrat Katha: मार्गशीर्ष महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को गणाधिप संकष्टी चतुर्थी और अगहन संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। मान्यता अनुसार माता सीता को खोजने से पहले हनुमान भगवान ने ये व्रत किया था। जानिए इस संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा।

Ganadhipa Sankashti Chaturthi Vrat Katha In Hindi (गणाधिप संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा):

त्रेतायुग में दशरथ नामक एक प्रतापी राजा थे। उन्हें शिकार करना बेहद अच्छा लगता था। एक बार अनजाने में उनसें एक श्रवणकुमार नामक ब्राह्मण का वध हो गया। उस ब्राह्मण के अंधे मां-बाप ने राजा दशरथ को शाप दिया कि जिस प्रकार हम लोग पुत्रशोक में मर रहे हैं, उसी तरह तुम्हारी भी पुत्रशोक में मृत्यु होगी। इससे राजा बहुत परेशान हो गए। उन्होंने पुत्रेष्टि यज्ञ कराया। फलस्वरूप जगदीश्वर ने राम रूप में उनके यहां अवतार लिया। वहीं भगवती लक्ष्मी जानकी के रूप में अवतरित हुईं।

Ganadhip Sankashti Chaturthi Vrat Katha

Ganadhip Sankashti Chaturthi Vrat Katha In Hindi

पिता की आज्ञा पाकर भगवान राम, उनकी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण वन को गए जहां उन्होंने खर-दूषण आदि अनेक राक्षसों का वध किया। इससे क्रोधित होकर रावण ने सीताजी का अपहरण कर लिया। फिर सीता की खोज में भगवान राम ने पंचवटी का त्याग किया और ऋष्यमूक पर्वत पर पहुंचकर सुग्रीव से मैत्री की। इसके बाद सीता जी की खोज में हनुमान आदि वानर तत्पर हुए। उन्हें ढूंढते-ढूंढते गिद्धराज संपाती को देखा। वानरों को देखकर संपाती ने उनकी पहचान पूछी कहा कि तुम कौन हो? इस वन में कैसे आये हो? किसने तुम्हें भेजा है?

संपाती की बात सुनकर वानरों ने उत्तर दिया कि दशरथ नंदन रामजी, सीता और लक्ष्मण जी के साथ दंडकवन में आए हैं। जहां पर उनकी पत्नी सीताजी का अपरहण हो गया है। हे मित्र! इस बात को हम लोग नहीं जानते कि सीता कहां हैं?

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