Devshayani Ekadashi Vrat 2026 Parana Time: देवशयनी एकादशी को सभी एकादशियों में महापुण्यदायी और फलदायी माना गया है, जिसका व्रत हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि जो लोग सच्चे मन से देवशयनी एकादशी का व्रत रखते हैं, उन्हें हर तरह के पाप से मुक्ति मिलती है। साथ ही जीवन में आ रही परेशानियों का समाधान मिलना शुरू हो जाता है। द्रिक पंचांग की गणना के अनुसार, आज 25 जुलाई 2026, शनिवार को देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। चलिए अब जानते हैं आज की एकादशी यानी देवशयनी एकादशी व्रत का पारण किस समय और कैसे होगा।
देवशयनी एकादशी व्रत का पारण कब और कैसे करें?
देवशयनी एकादशी व्रत का पारण कब है
25 जुलाई 2026 की एकादशी यानी देवशयनी एकादशी व्रत का पारण आज नहीं, बल्कि कल होगा। कल 26 जुलाई 2026 को सुबह आप देवशयनी एकादशी व्रत का पारण कर सकते हैं।देवशयनी एकादशी का पारण कितने बजे तक है
देवशयनी एकादशी व्रत का पारण आमतौर पर अगले दिन सूर्योदय के पश्चात (बाद में) किया जाता है, लेकिन इस दौरान द्वादशी तिथि का होना जरूरी है। द्रिक पंचांग की मानें तो देवशयनी एकादशी व्रत का पारण 26 जुलाई 2026, रविवार को करना शुभ रहेगा। 26 जुलाई यानी कल दोपहर में 1 बजकर 57 मिनट पर द्वादशी तिथि समाप्त होगी, जबकि सूर्योदय सुबह 05 बजकर 38 मिनट पर होगा। वहीं, कल सुबह 05 बजकर 39 मिनट से पारण का समय शुरू होगा, जो कि सुबह 08 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगा। इस दौरान आप अपना व्रत खोल सकते हैं।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: देवशयनी एकादशी पर तुलसी का पत्ता तोड़ें या नहीं, तुलसी में जल चढ़ाएं या नहीं, जानिए नियम
देवशयनी एकादशी व्रत का पारण कैसे करें
एकादशी व्रत का पारण करने से पहले विष्णु जी की पूजा की जाती है। कल सुबह शुभ मुहूर्त में आप स्नान करके पीले रंग के कपड़े पहनकर तैयार हो जाएं। फिर विष्णु जी की मूर्ति का गंगाजल से अभिषेक करें। मूर्ति को पीले या सफेद रंग के नए वस्त्र पहनाएं और श्रृंगार करें। साथ ही विष्णु जी को चंदन, अक्षत, फल, फूल, तुलसी दल और मिठाई अर्पित करें। घी का दीपक जलाने के बाद 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।' मंत्र का 11 बार जाप करें। साथ ही मां लक्ष्मी और देवी तुलसी का स्मरण करें। अब आरती करें।
अंत में व्रत के दौरान जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए माफी मांगें। इसके लिए अपने हाथ में थोड़ा सा जल लें और 3 बार 'भक्तस्तुतो भक्तपर: कीर्तिद: कीर्तिवर्धन:। कीर्तिर्दीप्ति: क्षमाकान्तिर्भक्तश्चैव दया परा।।' मंत्र का जाप करें। फिर जल को विष्णु जी के चरणों में अर्पित कर दें। इसके बाद आप अपना व्रत खोल सकते हैं।
देवशयनी एकादशी का व्रत क्या खाकर खोलें
भगवान विष्णु को प्रसाद में आपने जो फल, तुलसी दल या मिठाई अर्पित की है, उसे खाकर आप अपना व्रत खोल सकते हैं। इसके बाद सात्विक भोजन करें, जिसमें मूंग दाल की खिचड़ी, लौकी या कद्दू की सब्जी, बिना तेल की हल्की रोटी या उबले चावल खा सकते हैं।
