Kartik Purnima Katha In Hindi: कार्तिक पूर्णिमा की संपूर्ण कथा यहां पढ़ें

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated Nov 8, 2022, 06:56 AM IST

Kartik Purnima Vrat Katha: शास्त्रों की मानें तो कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

Kartik Purnima Katha In Hindi: हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दिवाली मनाई जाती है। लेकिन इस बार चंद्र ग्रहण लगने की वजह से देव दिवाली एक दिन पहले यानी 7 नवंबर को मनाई गई। वहीं कार्तिक पूर्णिमा व्रत 8 नवंबर को ही रखा जायेगा। इस दिन स्नान-दान का विशेष महत्व होता है। कार्तिक पूर्णिमा पर ब्रह्म मुहूर्त में नदी स्नान बेहद ही शुभ फलदायी बताया जाता है। पूर्णिमा तिथि 8 नवंबर को शाम 4 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। जानें कार्तिक पूर्णिमा की पावन व्रत कथा।

dev diwali katha

Dev Diwali 2022: देव दिवाली का पर्व 7 सितंबर को यानी आज मनाया जा रहा है।

कार्तिक पूर्णिमा व्रत कथा (Kartik Purnima Vrat Katha)

पौराणिक कथा के अनुसार तारकासुर नाम का एक दैत्य था, जिसके 3 पुत्र थे। तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली (त्रिपुरा)। जब भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय जी ने तारकासुर राक्षस का वध कर दिया तो उसके तीनों पुत्रों ने बदला लेने के लिए दिन-रात घोर तपस्या शुरू कर दी थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी प्रकट हुए और उन्होंने उन तीनों को वरदान मांगने के लिए कहा। तो उन्होंने अमर होने का वरदान मांगा। ब्रह्मा जी ये बात अच्छे से जानते थे कि यदि उन्हें यह वरदान दे दिया गया तो वे अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करेंगे और सभी को परेशान करेंगे। इसलिए उन्होंने ये वरदान देने से साफ मना कर दिया।

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