Christmas 2022: 25 दिसंबर 2022 को अब गिने-चुने दिन रह गए हैं। हर साल यह प्रभू यीशू यानी ईसा मसीह के जन्ददिवस के उपलक्ष्य में विश्वभर में धूमधाम से मनाया जाता है। पहली बार क्रिसमस रोम में 336 ईस्वी में मनाया गया था। क्रिसमस लोगों को खुशी और शांति का सन्देश देता है। क्रिसमस 25 दिसंबर से 6 जनवरी (एपिफेनी) 12 दिनों तक रहता है। क्रिसमस पर घंटी, केक, मोमबत्ती, मोजे सभी का अपना अगल महत्व है। इस दिन चर्च में एक जुट होकर लोग प्रार्थनाएं करते हैं और परिवार व दोस्तों के साथ मिलकर इस दिन को सेलिब्रेट करते हैं। खुशियों और एकता का संदेश देने वाले इस त्योहार की कई ऐसे अनूठी और दिलचस्प परंपराएं हैं, जिसे शायद आप नहीं जानते हों।
क्रिसमस पर घंटियां और मोजे का है खास महत्व
घंटियां
इस त्योहार पर लोग अपने घर में क्रिसमस ट्री लगाते हैं। इसे एक रात पहले ही लगा दिया जाता है और उसे कई खास वस्तुओं से सजाया जाता है। इसमें घंटियां भी शामिल होती हैं। ईसाई धर्म में मान्यता है घर को घंटियों से सजाने से नकारात्मक ऊर्जा बाहर चली जाती है। इसे बजाकर ही लोग ईसा मसीह के जन्मदिवस को सेलिब्रेट करते हैं।
केक
जिस तरह हिन्दू धर्म के त्योहारों में लोग एक दूसरे को मिठाईयां बांटते हैं, उसी तरह क्रिसमस पर केक खाने और बांटने की परंपरा है। इस दिन केक बांटकर लोग एक दूसरे के साथ अपनी खुशियां बांटते हैं। मान्यता है कि इससे लोग अपनी खुशियां देकर तनाव और अवसाद खत्म करते हैं।
मोजे
क्रिसमस पर घरों में मोजे लटकाकर भी सजावट की जाती है। ईसाई धर्म में इसके पीछे कहानी है कि एक व्यक्ति पैसे के अभाव में अपनी तीन बेटियों की शादी नहीं कर पा रहा था। सैंट निकोलस ने उस व्यक्ति की मदद के लिए सोने से भरी पोटली चिमनी में डाली और वह चिमनी के पास लटके मौजे में जा गिरी। मान्यता है कि क्रिसमस पर मोजे में सैंटा अपनी खुशियों की पोटली इसमें डालते हैं।
मोमबत्ती
हिन्दू धर्म में जिस तरह दीपक लगाकर देवी-देवताओं की पूजा होती है, उसी तरह क्रिसमस पर मोमबत्ती जलाकर लोग प्रभू यीशू की प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि मोमबत्ती से दुख के अंधकार दूर होते हैं और सुख के प्रकाश फैलता है।
क्रिसमस ट्री
क्रिसमस ट्री इस त्योहार का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। मान्यता है कि हरा भरा क्रिसमस ट्री खुशहाली का प्रतीक होता है। इसके साथ घर में खुशहाली आती है और घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
