Choti Diwali 2026 Mein kab hai: दिवाली के मुख्य पर्व से एक दिन पहले छोटी दिवाली मनाई जाती है। लेकिन इस पर्व की तारीख को लेकर इस बार थोड़ा असमंजस है। कोई 7 नवंबर को छोटी दिवाली बता रहा है, तो कहीं इसकी तारीख 8 नवंबर बताई जा रही है। ऐसे में सवाल है कि आखिर सही तारीख कौन सी है?
छोटी दिवाली 2026 की सही डेट क्या है (AI Image)
दरअसल, साल 2026 में छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली एक ही दिन पड़ रही हैं। यानी नरक चतुर्दशी और दीपावली का पर्व 8 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। इसकी वजह चतुर्दशी और अमावस्या तिथि का समय है। आइए जानते हैं छोटी दिवाली की सही तारीख, तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।
7 या 8 नवंबर- छोटी दिवाली 2026 की सही तारीख क्या है
इस तारीख को लेकर असमंजस की वजह पंचांग में चतुर्दशी तिथि का दो दिनों तक रहना है। पंचांग के अनुसार, कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को सुबह लगभग 10:48 बजे शुरू होगी और 8 नवंबर को सुबह 11:28 बजे तक रहेगी। यानी 7 नवंबर को सूर्योदय के समय चतुर्दशी तिथि नहीं होगी, जबकि 8 नवंबर को सूर्योदय के समय चतुर्दशी रहेगी।
इसी आधार पर नरक चतुर्दशी का पर्व 8 नवंबर को मनाया जाएगा। 7 नवंबर को कुछ कैलेंडर में चतुर्दशी की शुरुआत के कारण छोटी दिवाली की तारीख दिखाई दे रही है। लेकिन पर्व की पूजा और अभ्यंग स्नान के लिए सूर्योदय और चतुर्दशी के संयोग को देखना जरूरी है।
इसलिए 2026 में छोटी दिवाली के लिए 8 नवंबर को मनाई जाएगी और इसी दिन बड़ी दिवाली भी मनाई जाएगी।
छोटी दिवाली 2026 की तारीख और समय (Choti Diwali 2026 Date and Time)
- छोटी दिवाली 2026 - 8 नवंबर 2026, रविवार
- कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि प्रारंभ - 7 नवंबर, सुबह 10:48 बजे
- कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि समाप्त - 8 नवंबर, सुबह 11:28 बजे
- कार्तिक अमावस्या तिथि प्रारंभ - 8 नवंबर, सुबह 11:28 बजे
छोटी दिवाली 2026 पर अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त
छोटी दिवाली पर अभ्यंग स्नान की खास परंपरा है। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर शरीर पर तेल लगाकर स्नान किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को रूप, सौभाग्य और आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है। पंचांग गणना के अनुसार, 8 नवंबर को अभ्यंग स्नान का समय सुबह लगभग 4:52 बजे से 6:37 बजे के बीच रहेगा। स्थानीय सूर्योदय और चंद्रोदय के अनुसार इसमें थोड़ा अंतर हो सकता है।
छोटी दिवाली पर पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है
छोटी दिवाली पर सुबह अभ्यंग स्नान के बाद भगवान श्रीकृष्ण और यमराज का स्मरण करने की परंपरा है। शाम को घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाए जाते हैं। इसे यम दीपदान भी कहते हैं। चूंकि इस बार छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली एक ही दिन हैं, इसलिए शाम को मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा भी की जाएगी।
छोटी दिवाली क्यों मनाई जाती है
छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी भी कहते हैं। इसका संबंध भगवान श्रीकृष्ण और नरकासुर की पौराणिक कथा से है। मान्यता है कि नरकासुर नाम के राक्षस ने अपने अत्याचारों से देवताओं और मनुष्यों को परेशान कर रखा था। उसने कई कन्याओं को बंदी बना लिया था। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उसका वध करके बंदी कन्याओं को मुक्त कराया।
कहा जाता है कि नरकासुर के अंत की खुशी में लोगों ने दीप जलाए और खुशियां मनाईं। तभी से इस दिन को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाने की परंपरा चली आ रही है।
