Chhathi Mata Ki Aarti: साल में दो बार छठ पर्व मनाया जाता है एक बार चैत्र महीने में दूसरी बार कार्तिक महीने में। छठ सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का पर्व है। ये पर्व पूरे चार दिनों तक चलता है। मुख्य रूप से छठ का त्योहार उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और नेपाल में मनाया जाता है। कहते हैं जो कोई भी सच्चे दिल से ये व्रत रखता है उसकी समस्त मनोकामना पूर्ण हो जाती है। अभी चैती छठ पर्व चल रहा है। जिसकी शुरुआत 25 मार्च से हुई है और इसका समापन 28 मार्च को होगा। इस पर्व की पूजा के समय छठी मैया की इस आरती को करना बिल्कुल भी न भूलें।
छठ माता की आरती
छठी मैया की आरती (Chhathi Mata Ki Aarti)
जय छठी मईया ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
ऊ जे नारियर जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥जय॥
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥
अमरुदवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
शरीफवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥जय॥
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥
ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
सभे फलवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥जय॥
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥
