छठ व्रत में सूर्य देव के साथ-साथ छठी मैया की भी उपासना की जाती है। इस दिन महिलाएं 36 घंटों का निर्जला व्रत रखती हैं यानी अन्न और जल कुछ भी ग्रहण नहीं करती हैं। ये व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, खुशहाल जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। ये सबसे कठिन उपवास माना जाता है। इस व्रत में सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है और फिर छठी मैया की आरती गाकर पूजा संपन्न की जाती है। यहां देखें छठ माता की आरती।
छठ माता की आरती
छठ माता की आरती (Chhath Mata Ki Aarti)
जय छठी मैया ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥ जय छठी मैया…
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
ऊ जे नारियर जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए॥ जय छठी मैया…
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥ जय छठी मैया…
अमरुदवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥ जय छठी मैया…
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
शरीफवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए॥ जय छठी मैया…
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥ जय छठी मैया…
ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥ जय छठी मैया…
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
सभे फलवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए॥ जय छठी मैया…
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥ जय छठी मैया…
