Chehlum Arbaeen Ibadat Guide: चेहल्लुम या अरबईन इस्लामी इतिहास की एक महत्वपूर्ण तारीख है। वर्ष 2026 में चेहल्लुम 4 अगस्त 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। यह दिन 20 सफर 1448 हिजरी को आएगा। चेहल्लुम, इमाम हुसैन इब्न अली इब्न अबी तालिब और कर्बला के शहीदों की शहादत के 40 दिन पूरे होने पर मनाया जाता है। इमाम हुसैन, पैगंबर मुहम्मद इब्न अब्दुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नवासे थे। कर्बला की घटना इस्लामी इतिहास में सब्र, कुर्बानी, इंसाफ और सच्चाई की मिसाल के रूप में याद की जाती है। इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को याद करते हुए दुआ, कुरआन की तिलावत, ज़ियारत और इबादत करते हैं।
चेहल्लुम पर कैसे करें खुदा की इबादत
चेहल्लुम के दिन कौन-कौन से अमल किए जाते हैं
चेहल्लुम के दिन अलग-अलग इस्लामी परंपराओं के अनुसार इबादत के तरीकों में अंतर हो सकता है। शिया इस्लामी परंपरा में इस दिन विशेष रूप से ज़ियारत-ए-अरबईन, नमाज, दुआ और जिक्र का महत्व बताया गया है।
इस दिन किए जाने वाले प्रमुख अमल:
- ज़ियारत-ए-अरबईन पढ़ना
- पांच वक्त की नमाज की पाबंदी करना
- नाफिल नमाज अदा करना
- कुरआन शरीफ की तिलावत करना
- दुरूद और जिक्र करना
- इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों के लिए दुआ करना
- जरूरतमंदों की मदद करना
ज़ियारत-ए-अरबईन क्या है
ज़ियारत-ए-अरबईन एक विशेष ज़ियारत है जिसे चेहल्लुम के दिन इमाम हुसैन की याद में पढ़ा जाता है। शिया इस्लामी स्रोतों में इसे इमाम जाफर सादिक से संबंधित बताया गया है। इस ज़ियारत में इमाम हुसैन की कुर्बानी, उनके उद्देश्य और सत्य व इंसाफ के रास्ते को याद किया जाता है।
ज़ियारत-ए-अरबईन में:
- इमाम हुसैन को सलाम पेश किया जाता है।
- कर्बला के शहीदों को याद किया जाता है।
- अल्लाह से हक और सच्चाई के रास्ते पर चलने की दुआ की जाती है।
- इमाम हुसैन के आदर्शों पर कायम रहने का संकल्प लिया जाता है।
चेहल्लुम के दिन 51 रकअत नमाज का महत्व
शिया इस्लामी परंपरा में चेहल्लुम के दिन 51 रकअत नमाज पढ़ने का विशेष महत्व बताया जाता है। इसमें 17 रकअत फर्ज नमाज, 34 रकअत नाफिल नमाज शामिल होती हैं। यह 51 रकअत नमाज पांच वक्त की अनिवार्य नमाज और नाफिल इबादत को मिलाकर पूरी की जाती है। इसका उद्देश्य अल्लाह की इबादत करना और इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करना है।
चेहल्लुम के दिन नमाज पढ़ने का तरीका
चेहल्लुम के दिन सबसे पहले वुज़ू करके पाकी हासिल करें। नमाज के लिए साफ जगह पर खड़े होकर अल्लाह की रज़ा के लिए नीयत करें।
फर्ज नमाज का तरीका
फर्ज नमाज सामान्य दिनों की तरह ही अदा की जाती है।
फज्र की नमाज
- 2 रकअत सुन्नत
- 2 रकअत फर्ज
ज़ुहर की नमाज
- 4 रकअत फर्ज
अस्र की नमाज
- 4 रकअत फर्ज
मग़रिब की नमाज
- 3 रकअत फर्ज
इशा की नमाज
- 4 रकअत फर्ज
नाफिल नमाज कैसे पढ़ें
नाफिल नमाज अल्लाह की रज़ा के लिए पढ़ी जाती है।
नफ्ल नमाज के लिए:
- वुज़ू करें।
- दिल में नीयत करें।
- तकबीर कहकर नमाज शुरू करें।
- सूरह फातिहा पढ़ें।
- इसके बाद कोई दूसरी सूरह पढ़ें।
- रुकू और सजदा करें।
- दूसरी रकअत पूरी करके सलाम फेरें।
चेहल्लुम की दुआ कैसे करें
चेहल्लुम के दिन दुआ करते समय सबसे पहले अल्लाह की हम्द बयान की जाती है और पैगंबर मुहम्मद इब्न अब्दुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर दरूद भेजा जाता है। इसके बाद इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को याद करते हुए दुआ की जाती है।
दुआ:
"ऐ अल्लाह! इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की कुर्बानी को अपनी बारगाह में स्वीकार फरमा। हमें हक और इंसाफ के रास्ते पर चलने की तौफीक अता फरमा। हमारे गुनाहों को माफ फरमा, हमारे दिलों में ईमान, सब्र और नेक अमल की ताकत पैदा फरमा। आमीन।"
इसके अलावा:
'रब्बिगफिर वर्हम व अंता खैरुर्राहिमीन'
(ऐ मेरे रब! मुझे माफ फरमा और मुझ पर रहम फरमा, तू सबसे बेहतर रहम करने वाला है।)
जैसी दुआएं भी पढ़ी जा सकती हैं।
दुरूद और जिक्र का अमल
चेहल्लुम के दिन दुआ और इबादत से पहले दुरूद शरीफ पढ़ना अच्छा अमल माना जाता है। कई अकीदतमंद इस दिन तीन बार दुरूद शरीफ पढ़ते हैं। अल्लाह से मगफिरत की दुआ करते हैं।अमन और सलामती की दुआ मांगते हैं। इसके अलावा अल्लाह का जिक्र और इस्तिगफार भी किया जाता है।
कुरआन की तिलावत और फातिहा
चेहल्लुम के दिन कुरआन शरीफ की तिलावत की जाती है और उसका सवाब इमाम हुसैन तथा कर्बला के शहीदों को पहुंचाने की नीयत की जाती है। कई लोग इस दिन सूरह फातिहा, सूरह यासीन, अन्य कुरआनी आयतों की तिलावत करते हैं।
चेहल्लुम के दिन इन बातों का रखें ध्यान
चेहल्लुम के दिन पांच वक्त की नमाज की पाबंदी करें। इसके साथ खुदा की ज्यादा से ज्यादा इबादत करें। कर्बला के संदेश को समझें। किसी भी प्रकार के झगड़े और विवाद से बचें। जरूरतमंदों की मदद करें। दुआ और नेक कामों में समय बिताएं।
कुर्बानी को याद करने का अवसर है चेहल्लुम
चेहल्लुम केवल एक तारीख नहीं, बल्कि इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करने का अवसर है। कर्बला की घटना मुस्लिम इतिहास में सत्य, इंसाफ, सब्र और सिद्धांतों पर कायम रहने की प्रेरणा देती है। चेहल्लुम के दिन इबादत, दुआ और ज़ियारत के माध्यम से इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को याद किया जाता है और अल्लाह से बेहतर जीवन, नेक रास्ते और ईमान की मजबूती की दुआ की जाती है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी इस्लामिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
