Chaiti Chhath 2025 Sandhya Arghya Time: चैत्र छठ पूजा का खास समय चल रहा है। चार दिन का ये व्रत किसी त्योहार से कम नहीं होता है। इन चार दिनों की शुरुआत नहाय खाय से होती है जिसके बाद दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उषा अर्घ्य के साथ व्रत का समापन होता है। आप छठ का तीसरा दिन है यानी संध्या अर्घ्य का दिन। आज देशभर में व्रती सूर्यदेव को जल चढ़ाएंगे। अगर आप भी छठ का व्रत कर रहे हैं और सूर्य अर्घ्य के समय को लेकर कंफ्यूज हैं तो यहां से सही समय जान सकते हैं। यहां संध्या अर्घ्य के समय के साथ शुभ मुहूर्त और अर्घ्य देने के नियम के बारे में बताया गया है। साथ ही आप संध्या अर्घ्य क्यों दिया जाता है, ये भी जान सकते हैं।
संध्या अर्घ्य का समय-
छठ पूजा में डूबते सूर्य को अर्घ्य देने को संध्या अर्घ्य कहते हैं। संध्या अर्घ्य आज ही है। 3 अप्रैल 2025 को संध्या अर्घ्य देने का समय शाम के समय 6:40 तक है। इस दिन सुर्यास्थ का यही समय है।
संध्या अर्घ्य देने का नियम-
छठ के तीसरे दिन सूर्य देव को शाम में अर्घ्य देने के कुछ खास नियम हैं। संध्या अर्घ्य देते हुए पवित्र जल में कमर तक खड़े होना चाहिए और जल हमेशा लोटे में जल, कच्चा कुछ, लाल चंदन फूल, अक्षत और कुश डालकर दिया जाता है। इस दौरान सूर्य मंत्रों का जाप भी किया जाता है और सूर्य देव को अर्घ्य देने के साथ सूप को भी जल अर्पित किया जाता है।
संध्या अर्घ्य का महत्व-
कहते हैं कि उगते हुए सूर्य को तो हर कोई नमस्कार करता है, लेकिन छठ की ही पूजा है जिसमें डूबते सूर्य की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि डूबते सूर्य को अर्घ्य देने से जीवन की सभी परेशानियां दूर होती हैं, सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और सौभाग्य में वृद्धि होती है। छठ पूजा में संध्या अर्घ्य देने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शक्ति का संचार होता है, जिससे व्यक्ति को सफल जीवन का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही सूर्य देव आपके परिवार को खुशहाली और आपकी संतान को लंबी आयु का आशीर्वाद देते हैं।
