Budh Pradosh Vrat Katha In Hindi: बुध प्रदोष व्रत की संपूर्ण कथा यहां पढ़ें

Budhwar Pradosh Vrat Katha In Hindi: 3 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन बुधवार है इसलिए ये बुध प्रदोष व्रत कहलाएगा। यहां हम आपको बताएंगे बुध प्रदोष व्रत की पौराणिक व्रत कथा।

Budh Pradosh Vrat Katha In Hindi (बुध प्रदोष व्रत कथा): वार के अनुसार हर प्रदोष व्रत का महत्व अलग-अलग होता है। जो प्रदोष व्रत बुधवार को पड़ता है उसे बुध प्रदोष व्रत कहते हैं। मान्यताओं अनुसार बुधवार प्रदोष व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। इस प्रदोष व्रत में भगवान शिव की सुबह-शाम विधि विधान पूजा करनी चाहिए। इसके अलावा शिवलिंग पर जल जरूर अर्पित करें। साथ में बुध प्रदोष व्रत की कथा भी जरूर पढ़ें।

बुध प्रदोष व्रत कथा (Budh Pradosh Vrat Katha)

एस समय की बात है एक पुरुष का नया-नया विवाह हुआ था। विवाह के कुछ दिनों बाद ही उसकी पत्‍नी अपने घर चली गई थी। कुछ दिनों के बाद वह पुरुष अपनी पत्‍नी को लेने उसके घर पहुंचा। जब वह अपने पत्नी को लेकर लौटने लगा तो लड़के के ससुराल वालों ने उसे जाने से मना कर दिया क्योंकि उस दिन बुधवार था। लेकिन पुरुष ने अपने ससुराल वालों की बात नहीं सुनीं और वो अपनी पत्नी की उसी दिन घर से ले गया।

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