Budh Pradosh Vrat Katha: आज यानि 3 मई को बुध प्रदोष व्रत रखा जाएगा। प्रदोष व्रत जब बुधवार को पड़ता है तो उसे बुध प्रदोष व्रत के नाम से पुकारते हैं। हिंदू पंचांग अनुसार प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को पड़ता है। मान्यता है इस व्रत को करने से भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है। जिससे व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। बुध प्रदोष व्रत वाले दिन भगवान शिव की विधि विधान पूजा करें और उन्हें बेल पत्र जरूर अर्पित करें। अब जानिए बुध प्रदोष व्रत की कथा।
बुध प्रदोष व्रत की पावन कथा यहां देखें
Budh Pradosh Vrat Katha (बुध प्रदोष व्रत कथा हिंदी में)
बुध प्रदोष व्रत की कथा के अनुसार एक पुरुष की नई-नई शादी हुई थी। विवाह के 2 दिनों बाद उसकी पत्नी मायके चली जाती है। कुछ दिनों बाद वो पुरुष अपनी पत्नी को लेने उसके घर आया। बुधवार के दिन जब वह पत्नी के साथ लौटने लगा तो लड़की के मायके वालों ने उसे रोकने का भरपूर कोशिश की लेकिन वो लड़का नहीं माना। लड़के के ससुराल वालों ने उसे स्पष्ट बताया कि विदाई के लिए बुधवार का दिन शुभ नहीं होता है। लेकिन उसने किसी की एक नहीं मानी और अपनी पत्नी को लेकर बैल गाड़ी से निकल पड़ा।
जैसे ही दोनों पति-पत्नी नगर के बाहर पहुंचे तो उस लड़के की पत्नी को प्यास लगने लगी। पुरुष लोटा लेकर पानी की तलाश में निकल पड़ा। पत्नी पेड़ के नीचे बैठ गई। थोड़ी देर में जब पुरुष पानी लेकर वापस लौटा, तो उसने देखा कि उसकी पत्नी किसी के साथ हंस-हंसकर बातें कर रही है और उसके लोटे से पानी पी रही है। ये देखकर वो क्रोधित हो गया।
वह अपनी पत्नी के निकट पहुंचा तो नजारा देखकर दंग रह गया क्योंकि उस आदमी की सूरत बिल्कुल उसी लड़के के जैसी थी। पत्नी भी ये देखकर सोच में पड़ गई। दोनों पुरुष झगड़ने लगे। धीरे धीरे वहां भीड़ एकत्रित हो गई। हमशक्ल आदमियों को देख हर कोई आश्चर्य में पड़ गया।
फिर लोगों ने स्त्री से पूछा कि इन दोनों में से तुम्हारा पति कौन है? वह किंकर्तव्यविमूढ़ हो गई। तब पुरुष शंकर भगवान से प्रार्थना करने लगा- हे भगवान! हमारी रक्षा करें। मुझसे बहुत बड़ी भूल हुई कि मैंने अपने सास-ससुर की बात नहीं सुनी और अपनी पत्नी को लेकर बुधवार के दिन निकल गया। पुरुष भगवान से कहने लगा कि मैं भविष्य में ऐसा कदापि नहीं करूंगा।
जैसे ही उसकी प्रार्थना पूरी हुई, दूसरा पुरुष अंतर्ध्यान हो गया। इसके बाद पति-पत्नी सकुशल अपने घर पहुंच गए। उस दिन के बाद से पति-पत्नी दोनों ही नियमपूर्वक बुध त्रयोदशी प्रदोष का व्रत रखने लगे। अत: बुध त्रयोदशी व्रत हर मनुष्य को करना चाहिए।
