Sawan 1st Somwar 2022 Date, Puja Vidhi, Muhurat: आज रखा जा रहा है सावन के पहले सोमवार का व्रत, पूजा के लिए देखें विधि, मुहूर्त, कथा, आरती, उपाय और मंत्र
Sawan 1st Somwar 2022 Date, Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Time, Samagri, Mantra: वर्ष 2022 में सावन का पवित्र महीना 14 जुलाई से प्रारंभ हो गया है। भगवान शिव को समर्पित इस महीने में हर सोमवार को व्रत रखा जाता है तथा उनकी पूजा और आराधना की जाती है। आज सावन 2022 का पहला सोमवार है। यहां जानें शिव जी की आराधना के लिए व्रत विधि, पूजा मुहूर्त, शुभ मुहूर्त समेत सभी महत्वपूर्ण जानकारी।
Sawan 1st Somwar 2022 Date, Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Samagri List: इस वर्ष भगवान शिव के प्रिय महीने सावन की शुरुआत 14 जुलाई से हुई है। सावन के पवित्र महीने में सोमवारी का व्रत रखना भक्तों के लिए अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। कहा जाता है कि भगवान शिव का जो भक्त सच्चे मन से इस महीने में उनकी पूजा-आराधना करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सोमवारी व्रत पुरुष और महिला, दोनों के लिए रखना मंगलमय माना गया है। आज सावन 2022 का पहला सोमवार है और भक्तों में शिव जी की पूजा-अर्चना के लिए भारी उतसाह देखा जा रहा है।
मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त सावन सोमवारी का व्रत रखता है तथा भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करता है उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। अपने पति की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए शादीशुदा महिलाएं यह व्रत रखती हैं। कहा जाता है कि, कुंवारी कन्याओं के लिए भी यह व्रत रखना लाभदायक होता है। जो कन्या यह व्रत रखती है उसे योग्य वर की प्राप्ति होती है।
सावन सोमवारी का व्रत रखने वाले भक्तों को नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए। यह व्रत पूरे विधि अनुसार किया जाता है। इस लाइव ब्लॉग के माध्यम से जानें कि सावन के पहले सोमवार पर व्रत कैसे रखें, क्या करें, पूजा विधि, व्रत विधि, आरती, नियम, कथा और मंत्र समेत सभी महत्वपूर्ण जानकारी।
ऐसे करें पहले सोमवार को व्रत
सावन के पहले सोमवार में व्रत रखने के लिए सुबह स्नान करके मंदिर जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करें। इस दौरान भगवान शिव को बेलपत्र धतूरा, भांग, चंदन, पुष्प आदि समर्पित करें। इसके बाद घर में जाकर भगवान शिव व मां पार्वती की विधि विधान से पूजा करें। पूजा करने के दौरान सबसे पहले भगवान गणेश की आरती करें। उसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें। इसके बाद भगवान शिव को रोली, अक्षत, पुष्प, धूप व दीपक अर्पित करें। इसके बाद सावन सोमवार के व्रत की कथा पढ़ें व भगवान शिव का मंत्र का जाप करें।
Sawan Somvar 2022: इस साल पड़ेंगे चार सोमवार
इस बार सावन के महीने में चार सोमवार व्रत पड़ेंगे। पहला सोमवार 18 जुलाई, दूसरा सोमवार 25 जुलाई व तीसरा सोमवार 01 अगस्त और चौथा सोमवार 08 अगस्त को पड़ेगा। 12 अगस्त को सावन खत्म हो जाएगा। इन चारों सोमवार का विशेष महत्व है। और इन सोमवार में व्रत रखने व विधि विधान से भगवान शिव की पूजा अर्चना करने पर भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा बनी रहती है।
सावन सोमवार के मंत्र
ओम त्र्यंबकम याजमाहे सुगंधिम पुष्ठी वर्धनम
उर्वारुकैमिवा बंधनाथ श्रीमती सुब्रमण्यम
करारचंद्रम वैका कायाजम कर्मगम वी
श्रवणनजम वा मनामम वैद परामहम
विहितम विहिताम वीए सर मेट मेटाट
क्षासव जे जे करुणाबधे श्री महादेव शंभो
ओम नमः शिवाय
ओम तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात
घर वापस आया साहूकार का बेटा
इधर साहूकार और उसकी पत्नी अपने बेटे का इंतजार कर रहे थे। वहीं, साहूकार का बेटा अभी पढ़ाई पूरी करने के बाद वापस अपने माता-पिता के पास जा रहा था। रास्ते में उसे वही राज्य मिला जहां की राजकुमारी का विवाह उसके साथ हो गया था। जब राजा ने साहूकार के बेटे को देखा तब उसने उसके साथ अपनी बेटी को विदा कर दिया। साहूकार और उसकी पत्नी ने यह प्रण लिया था कि अगर उनका बेटा वापस नहीं आएगा तो वह भी अपनी जान दे देंगे। ऐसे में जब उन्होंने अपने बेटे को वापस लौटते देखा तब वह दोनों बहुत खुश हुए।
ऐसे जीवित हुआ साहूकार का बेटा
राजकुमार के पिता की बात मानकर साहूकार का बेटा मंडप में बैठ गया। मंडप में बैठकर साहूकार के बेटे ने राजकुमारी को सारी सच्चाई बता दी। जिसके बाद राजकुमारी ने अपने पिता को सब बता दिया। जैसे ही राजकुमारी के पिता को सच्चाई पता चली वैसे ही उसने अपनी बेटी की विदाई रोक दी। जिसके बाद साहूकार का बेटा काशी की ओर बढ़ गया। काशी पहुंचने के बाद साहूकार के बेटे ने यज्ञ करवाया। जिस दिन यज्ञ हो रहा था उस दिन साहूकार के बेटे का 12वां जन्मदिन था। 12वें जन्मदिन पर साहूकार के बेटे की मौत हो गई जिसके बाद उसका मामा और सभी लोग विलाप करने लगे। वहीं से भगवान शिव और माता पार्वती गुजर रहे थे। जब माता पार्वती ने रोने की आवाज सुनी तब उन्होंने भगवान शिव से कहा कि वह उस बालक के मामा और सबकी पीड़ा दूर कर दें। माता पार्वती के कहने पर भगवान शिव ने साहूकार के बेटे को जीवनदान दे दिया।
ज्ञान प्राप्ति के लिए गया साहूकार का बेटा
जब साहूकार का पुत्र 11 वर्ष का हुआ तब उसे ज्ञान प्राप्ति के लिए साहूकार ने काशी भेज दिया। बेटे के साथ उसने बेटे के मामा को भी ढेर सारा धन देकर भेजा और कहा कि इस धन की मदद से वह लोग रास्ते में ब्राह्मणों को भोजन और यज्ञ करवाएं। साहूकार का बेटा और उसका मामा चलते-चलते एक शहर आ गए जहां की राजकुमारी का विवाह हो रहा था। जिस राजकुमार से उसका विवाह हो रहा था वह काना था और राजकुमार के पिता को डर था कि अगर यह बात राजा जान जाएगा तो उसके बेटे की शादी नहीं होगी। जैसे ही राजकुमार के पिता ने साहूकार के बेटे को देखा उसने कहा कि वह राजकुमार की जगह मंडप में बैठ जाए। साहूकार के बेटे को राजकुमार के पिता की यह बात पसंद नहीं आई लेकिन अंत में उसे ऐसा करना पड़ा।
सावन सोमवार व्रत की कथा, सावन सोमवार व्रत की कहानी, सावन सोमवार व्रत की पौराणिक कथा।
बहुत समय पहले एक साहूकार रहा करता था। उसके घर में सारी सुख-सुविधाएं थीं लेकिन उसकी कोई संतान नहीं थी। ऐसे में उसने सोमवार का व्रत रखना शुरू कर दिया और भोलेनाथ और आदिशक्ति की पूजा करने लगा। साहूकार की भक्ति से मां पार्वती प्रसन्न हो गईं लेकिन भगवान शिव ने उसे संतान प्राप्ति का आशीर्वाद नहीं दिया। मां पार्वती ने साहूकार की पूजा से प्रसन्न होकर भगवान शिव को उसे संतान का वरदान देने के लिए कहा। मां पार्वती की बात सुनकर भगवान शिव ने कहा कि साहूकार को वही मिलेगा जो उसके भाग्य में होगा। शिवजी की बात सुनकर मां पार्वती नाराज हो गईं और जिद करने लगीं। मां पार्वती को जिद करता देख भगवान शिव साहूकार को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद देने के लिए तैयार हो गए। लेकिन उन्होंने कहा कि इस बालक की मृत्यु 12 वर्ष में हो जाएगी। शिवजी का वरदान मिलने के बाद भी साहूकार खुश नहीं था।
भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए
सावन में अगर आप भगवान शिव को प्रसन्न करना चाहते हैं तो नीचे दिए गए मंत्रों का जप अवश्य करें।
श्री शिवाय नम: ।।
श्री शंकराय नम: ।।
श्री महेशवराय नम: ।।
Sawan Somvar 2022 Mantra: निरोगी जीवन के लिए मंत्र
अच्छी सेहत के लिए भक्तों को महामृत्युंजय का जाप अवश्य करना चाहिए। माना जाता है कि इस मंत्र के जाप से भक्तों को स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृ त्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ।।
Sawan Somvar 2022: सावन में ना करें इन चीजों का सेवन
सावन माह में दही खाने की सलाह नहीं दी जाती। इसका कारण यह होता है कि दही की तासीर ठंडी होती है जोकि इस माह बीमारी की संभावना को बढ़ा सकती है। सावन महीने में दही का सेवन करने से सर्दी जुकाम और गले से संबंधित बीमारियां हो सकती है।
Sawan Somvar 2022: शिव जी को क्यों चढ़ाया जाता है अक्षत?
सावन माह में शिवलिंग पर सफेद चावल या अक्षत चढ़ाने से धन लाभ होता है। सावन सोमवारी के दिन एक मुट्ठी अक्षत शिवजी को चढ़ाएं और इसके बाद यह अक्षत किसी गरीब को दान दे दें। ऐसा करने से रुपये-पैसों से जुड़ी समस्या दूर होती है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि चावल का कोई भी दाना टूटा हुआ न हो।
Sawan Somvar 2022: शिव जी को लगाएं किस चीज का भोग?
भगवान शिव को लस्सी का भोग भी लगाया जा सकता है। दही भगवान शिव को काफी प्रिय है। दही से भगवान शिव का अभिषेक भी किया जाता है। भगवान शिव को भोग लगाने के लिए दही में दूध डालकर इसे फेंट लें। इसके बाद इसमें चीनी डालकर अच्छे से घोल लेंं। आपकी लस्सी तैयार हो जाएगी। इसे भगवान शिव की पूजा करते समय भोग लगाएं।
Sawan Somvar 2022: शिव जी की पूजा कैसे करें
शिव शंकर को भोलेनाथ, गंगाधर, नीलकंठ आदि नामों से भी पुकारा जाता है। उनकी पूजा में फूल, दूध, गंगाजल, पंचामृत, बेलपत्र, धतूरा और सफेद मिठाई आदि जरूर शामिल करें। शिव जी को सावन में पांच अनाज भी चढ़ाए जाते हैं जिनमें चावल, काला तिल, अरहर की दाल, गेहूं और हरी मूंग शामिल रहते हैं।
Shiv Chalisa: सावन में करें शिव चालीसा का जाप
दोहा
जय गणेश गिरिजा सुवन,
मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम,
देहु अभय वरदान ॥
चौपाई
जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
कानन कुण्डल नागफनी के ॥
अंग गौर शिर गंग बहाये ।
मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
छवि को देखि नाग मन मोहे॥
मैना मातु की हवे दुलारी।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे।
सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ।
या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा।
सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥
दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं।
सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला।
जरत सुरासुर भए विहाला॥
कीन्ही दया तहं करी सहाई।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई।
कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनन्त अविनाशी।
करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो।
येहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो।
संकट से मोहि आन उबारो॥
मात-पिता भ्राता सब होई।
संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी।
आय हरहु मम संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदा हीं।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन।
मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं।
शारद नारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमः शिवाय।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई।
ता पर होत है शम्भु सहाई॥
ॠनियां जो कोई हो अधिकारी।
पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा जोई।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे।
ध्यान पूर्वक होम करावे॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा।
ताके तन नहीं रहै कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे।
अन्त धाम शिवपुर में पावे॥
कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥
दोहा
नित्त नेम कर प्रातः ही,
पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना,
पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु,
संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि,
पूर्ण कीन कल्याण॥
Sawan Somvar 2022: महामृत्युंजय मंत्र का जाप कैसे करें
सावन माह में महामृत्युंजय मंत्र का जाप बेहद कल्याणकारी और फलदाई माना जाता है। इसका जाप आप सावन के पहले दिन से शुरू करें या सोमवार से भी प्रारंभ कर सकते हैं। मंत्र का जाप सवा लाख बार किया जाता है। महामृत्युंजय मंत्र के जाप के समय आप रुद्राक्ष की माला का ही प्रयोग करें। इस मंत्र के जाप को दिन में 12 बजे से पहले कर लें। इसके बाद का समय सही नहीं माना जाता है। जब मंत्र का जाप पूर्ण हो जाए तो हवन जरूर करें।
Sawan Somvar 2022 Mantra: आज करें महामृत्युंजय मंत्र का जाप
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृ त्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
Sawan Somvar 2022: शहद से क्यों किया जाता है शिव जी का अभिषेक
सावन माह में शहद से भी शिवलिंग पर अभिषेक करना चाहिए। शिवलिंग पर शहद से अभिषेक करने से व्यक्ति की वाणी में मधुरता आती है और पापों का नाश होता है।
Sawan Somvar 2022: गन्ने के रस से करें शिव जी का अभिषेक
सावन में शिव जी का अभिषेक करना भक्तों के लिए लाभदायक माना गया है। गन्ने के रस से शिवलिंग पर अभिषेक करना उत्तम माना जाता है। ऐसा करने से व्यक्ति को आर्थिक समस्या से छुटकारा मिलता है।
Sawan Somvar 2022: आज कब से कब तक है राहु काल
जानकारों के मुताबिक, सावन के पहले सोमवार व्रत के दिन राहु काल सुबह 7:31 से सुबह 9:21 तक रहेगा।
Sawan Somvar 2022: सावन सोमवार पर करें शिव मंदिर के दर्शन
गुजरात में द्वारकाधाम से करीब 16 किलोमीटर की दूरी पर नागेश्वर ज्योतिर्लिंग है। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में दसवें स्थान पर है। सावन माह में इस मंदिर के दर्शन से पुण्य मिलता है। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर को लेकर कई कथाएं भी प्रचलित है।
Sawan Somvar 2022 Puja Muhurat: सावन 2022 के पहले सोमवार व्रत का पूजा मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, सावन सोमवार का पहला व्रत आज यानी 18 जुलाई को सुबह 8:40 से शुरू होकर 19 जुलाई को 2:42 तक रहेगा। व्रत करने वाले लोग 18 जुलाई को 5:00 बजे सुबह से व्रत की तैयारी कर सकते हैं।
Sawan Somvar 2022: सावन सोमवार व्रत में क्या ना खाएं
सावन सोमवार के व्रत में गेंहू, सूजी या आटे का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा लाल मिर्च और सादा नमक युक्त मसालेदार और तलीभुनी चीजों का सेवन भी वर्जित माना गया है।
Sawan Somvar 2022: भगवान शिव को लगाएं किस चीज का भोग
सावन का महीना शुरू हो चुका है। सावन का महीना भगवान शिव को अति प्रिय है। सावन के महीने में भक्त भगवान शिव की भक्ति में लीन हो जाते हैं। सावन के महीने में प्रभु शिव का जलाभिषेक करने का विशेष महत्व है। इस सावन भगवान शिव को मालपुए का भोग जरूर लगाएं।
Sawan Somvar 2022: Aaj ka Panchang, 18 July 2022
दिनांक- 18 जुलाई 2022
दिवस- सोमवार
माह- श्रावण,कृष्ण पक्ष,
तिथि- पंचमी 08:55 am तक फिर खष्ठी
सूर्योदय- 05:35 am
सूर्यास्त- 07:21 pm
नक्षत्र- पूर्वाभाद्रपद
सूर्य राशि- कर्क
चन्द्र राशि- कुम्भ 06:35 am तक फिर मीन
करण- तैतिल
योग- शोभन
Sawan Somvar 2022 Date: आज से शुरू हुआ सावन सोमवारी का व्रत
आज यानी 18 जुलाई से सावन 2022 में सोमवारी के व्रत का आरंभ हुआ है। आज सावन 2022 का पहला सोमवार है।
शिवलिंग पर जल अर्पित करते हुए इस मंत्र का करें जाप
मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम् ।
तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम् ॥
श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः । स्नानीयं जलं समर्पयामि।
ये है शिवलिंग पर जल चढ़ाने की सही दिशा
हिंदू शास्त्र के अनुसार, शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय पूर्व दिशा की ओर खड़ा नहीं होना चाहिए। क्योंकि पूर्व दिशा की ओर शिवलिंग का मुख होना चाहिए। वहीं पश्चिम दिशा की ओर मुख करके भी शिवलिंग पर जल अर्पित न करें। शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय स्वंय दक्षिण दिशा की ओर खड़े हो जाएं। ऐसा करने से भगवान का मुख उत्तर दिशा की ओर होगा।
भगवान शिव का प्रिय महीना है सावन माह
सावन का पवित्र महीना 14 जुलाई 2022 से शुरू हो चुका है जोकि 12 अगस्त 2022 तक रहेगा। सावन माह भगवान शिव का प्रिय महीना होता है। इस माह शिवभक्त महादेव की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं। चूंकि सावन भगवान का प्रिय माह होता है इसलिए इस पूजा में उन्हें ऐसी चीजें अर्पित की जाती है जो शिवजी को अत्यंत प्रिय है।
सावन व्रत में पानी की कमी का रखें खास ध्यान
सावन के महीने में गर्मी खूब पड़ती है। ऐसे मौसम में व्रत रखने पर हमारे शरीर में पानी की कमी हो जाती है। ऐसे में यदि आप सात्विक भोजन ग्रहण करें, तो आपके शरीर के लिए अति उत्तम होगा। फलहार के तौर पर आप सेब, केला, अनार, नाशपाती, तरबूज, खीरा, आम, खरबूजा, अनार खा सकता हैं। ये सारे फल शरीर में पानी की कमी की पूर्ति करता हैं।
सावन में सोमवार- कब-कब पड़ रहा है?
सावन 2022 प्रारंभ: 14 जुलाई 2022, गुरुवार
सावन का पहला सोमवार- 18 जुलाई 2022
सावन का आखिरी सोमवार- 8 अगस्त 2022
सावन 2022 का समापन- 12 अगस्त 2022, शुक्रवार
सावन सोमवार व्रत में क्या ना खाएं?
सावन सोमवार के व्रत में गेंहू,सूजी या आटे का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा लाल मिर्च और सादा नमक युक्त मसालेदार और तलीभुनी चीजों का सेवन भी वर्जित रहता है।
Sawan Somvar 2022: अर्पित किया जाता है भांग-धतूरा?
पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ तो उसमें हलाहल नाम का विष निकला। सृष्टि को इस विष से बचाने के लिए शिव जी ने स्वयं यह विष पी लिया। जिससे भोलेनाथ का कंठ नीला पड़ गया इस कारण शिव जी को नीलकंठ भी कहा जाता है। देवताओं और अश्विनी कुमारों ने शिव जी को भांग, धतूरा और बेलपत्र को दूध में मिलाकर औषधि के रूप में पिलाया। तब से ही भगवान शिव को भांग धतूरा अतिप्रिय है और भक्त पूजा में उन्हें उनकी प्रिय चीजें अर्पित करते हैं। इसलिए शिवजी की पूजा में भांग और धतूरा चढ़ाने का विधान है।
Sawam Somvar 2022 Shiv Ji Ki Aarti: भगवान शिव की आरती
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा
।।ॐ जय शिव..॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे
।।ॐ जय शिव..॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे
॥ ॐ जय शिव..॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी
॥ ॐ जय शिव..॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे
॥ ॐ जय शिव..॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता
॥ ॐ जय शिव..॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका
॥ ॐ जय शिव..॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी
॥ ॐ जय शिव..॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे
॥ ॐ जय शिव..॥
Sawan Somvar 2022: शिव चालीसा
दोहा
जय गणेश गिरिजा सुवन,
मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम,
देहु अभय वरदान ॥
चौपाई
जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
कानन कुण्डल नागफनी के ॥
अंग गौर शिर गंग बहाये ।
मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
छवि को देखि नाग मन मोहे॥
मैना मातु की हवे दुलारी।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे।
सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ।
या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा।
सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥
दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं।
सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला।
जरत सुरासुर भए विहाला॥
कीन्ही दया तहं करी सहाई।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई।
कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनन्त अविनाशी।
करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो।
येहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो।
संकट से मोहि आन उबारो॥
मात-पिता भ्राता सब होई।
संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी।
आय हरहु मम संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदा हीं।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन।
मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं।
शारद नारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमः शिवाय।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई।
ता पर होत है शम्भु सहाई॥
ॠनियां जो कोई हो अधिकारी।
पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा जोई।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे।
ध्यान पूर्वक होम करावे॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा।
ताके तन नहीं रहै कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे।
अन्त धाम शिवपुर में पावे॥
कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥
दोहा
नित्त नेम कर प्रातः ही,
पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना,
पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु,
संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि,
पूर्ण कीन कल्याण॥
खुली जगह पर रखें शिवलिंग
शिवलिंग जहां भी स्थापित हो ध्यान रहे कि आपका चेहरा पूर्व दिशा की ओर रहे। शिवलिंग की पूजा कभी भी दक्षिण दिशा में बैठकर नहीं होती है। इसके अलावा शिवलिंग की स्थापना कभी भी बंद जगह पर न करें। जैसे कमरे के अंदर अगर मंदिर है तो वहां शिवलिंग स्थापित न करें कहीं खुली जगह में ही शिवलिंग स्थापित करना चाहिए।
Sawan Somvar 2022: इस आकार से बड़ा शिवलिंग न रखें
अगर घर में शिवलिंग की स्थापना कर रहे हैं तो छोटा शिवलिंग ही स्थापित करें। घर में ज्यादा बड़े आकार का शिवलिंग नहीं रखना चाहिए। इसका आकार अंगूठे के ऊपर वाले पोर के बराबर ही होना चाहिए। इसके साथ ही घर में स्थापित करने के बाद रोजाना साफ-सफाई बेहद जरूरी होती है।
Sawan Somvar 2022: भगवान शिव को चढ़ाएं लड्डू का भोग
भगवान शिव को सावन के महीने में बूंदी के लड्डू का भोग जरूर लगाएं। भगवान शिव को भांग और पंचामृत भी पसंद होता है। इसके अलावा आप उन्हें रेवड़ी, चिरौंजी और मिश्री भी चढ़ा सकते हैं।
Sawan Somvar 2022 Dates: सावन सोमवार व्रत की तिथियां
पहला सावन- 18 जुलाई 2022
दूसरा सावन- 25 जुलाई 2022
तीसरा सावन- 01 अगस्त 2022
चौथा सावन- 08 अगस्त 2022
Sawan Somvar 2022: व्रत में भूलकर भी न खाएं ये चीजें
सावन सोमवार का व्रत निर्जला नहीं होता। यानी आप इसमें फलाहार या सेंधा नमक युक्त भोजन खा सकते हैं। लेकिन व्रत में बार-बार भोजन या फल न खाएं। व्रत में लहसुन,प्यार, सादा नमक (सफेद नमक), धनिया पाउडर और मिर्च का सेवन भी नहीं करना चाहिए। वहीं पूरे सावन माह मांसाहार भोजन और मदिरा का भी सेवन नहीं करना चाहिए।
शिवलिंग पर जल अर्पित करते हुए इस मंत्र का करें जाप
मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम् ।
तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम् ॥
श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः । स्नानीयं जलं समर्पयामि।
Sawan Somvar 2022: क्या है शिवलिंग पर जल चढ़ाने की सही दिशा
हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, कभी भी पूर्व दिशा की ओर खड़ा होकर शिवलिंग पर जल अर्पित नहीं करना चाहिए। शिवलिंग का मुख पूर्व दिशा में होना चाहिए। इसके साथ पश्चिम दिशा की ओर मुख करके भी शिवलिंग पर जल अर्पित नहीं करना चाहिए। शिवलिंग पर जल चढ़ाते दक्षिण दिशा की ओर खड़े रहें, ऐसा करने से भगवान का मुख उत्तर दिशा की ओर होगा।
Sawan Somvar 2022 Muhurat: सोमवार के पहले सोमवार पर मुहूर्त
सावन के पहला सोमवार पर रवि योग बन रहा है, रवि योग 18 जुलाई सुबह 5:40 से 19 जुलाई 2:42 तक रहेगा। 18 जुलाई को सुबह 5:40 के बाद से सावन सोमवार व्रत की पूजा श्रद्धालु कर सकते हैं। वैसे, तो भगवान शिव की पूजा में राहु काल नहीं देखा जाता है लेकिन, सावन के पहले सोमवार पर राहु काल सुबह 7:31 से सुबह 9:21 तक रहेगा। इस दिन भद्रा रात में 10:19 मिनट से लेकर 19 जुलाई को सुबह 5:41 तक रहेगा।
Sawan Somvar Vrat Ka Mahatva: क्या है सावन सोमवार व्रत का महत्व
कहा जाता है कि सावन सोमवार का व्रत करने से ग्रह दोष शांत होता है इसके साथ जीवन में सुख-समृद्धि आती है। कुंवारी लड़कियों के लिए भी यह महीना बेहद लाभदायक है, सावन सोमवार का व्रत करने से मनपसंद जीवनसाथी मिलता है। यह महीना भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती को भी समर्पित है।
सावन 2022 के पहले सोमवार व्रत का पूजा मुहूर्त
Sawan Somvar 2022 Vrat: जल से क्यों करें शिव जी का अभिषेक?
सावन में भगवान शिव का अलग-अलग चीजों से अभिषेक किया जाता है। कहा जाता है कि भोलेनाथ को शुद्ध जल से अभिषेक करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
Sawan Somvar 2022: शिव जी को क्यों अर्पित किया जाता है भांग-धतूरा?
सावन सोमवार की पूजा में भगवान शिव जी को भांग-धतूरा अर्पित किया जाता है। कहा जाता है कि शिव जी को यह चीजें चढ़ाने से वह जल्दी प्रसन्न होते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ तो उसमें हलाहल नाम का विष निकला। सृष्टि को इस विष से बचाने के लिए शिव जी ने स्वयं यह विष पी लिया। जिससे भोलेनाथ का कंठ नीला पड़ गया इस कारण शिव जी को नीलकंठ भी कहा जाता है। विष का सेवन करते ही शिव जी व्याकुल होने लगे। देवताओं और अश्विनी कुमारों ने शिव जी को भांग, धतूरा और बेलपत्र को दूध में मिलाकर औषधि के रूप में पिलाया। इसके बाद शिव जी की व्याकुलता दूर हुई। तब से ही भगवान शिव को भांग धतूरा अतिप्रिय है और भक्त पूजा में उन्हें उनकी प्रिय चीजें अर्पित करते हैं। इसलिए शिवजी की पूजा में भांग और धतूरा चढ़ाने का विधान है।
Sawan Somvar 2022 Mantra: सावन सोमवार 2022 पूजा मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
Sawan Somvar 2022 Puja Samagri: सावन सोमवार 2022 पूजन सामग्री
Sawan Somvar 2022: सावन सोमवार में क्यों जरूरी है शिव जी की आरती?
हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, कोई भी पूजा भगवान की आरती के बिना अधूरी मानी गई है। किसी की पूजा का अंत आरती के साथ करने से पूजा का संपूर्ण फल मिलता है। इसीलिए सावन के महीने में और सावन सोमवार पर पूजा का अंत हमेशा शिव जी की आरती के साथ करना चाहिए।
Sawan Somvar Puja Vidhi: कैसे करें सावन सोमवार पर पूजा?
सावन सोमवार का व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त हो जाना चाहिए और स्नान कर लेना चाहिए। स्नान करने के बाद अपने घर में गंगाजल का छिड़काव करें और अपने पूजा घर को साफ सुथरा कर लें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। भगवान शिव या शिवलिंग का जलाभिषेक करें। इसके बाद भोलेनाथ को गंगाजल, धतूरा, बेलपत्र और दूध अर्पित करें। अंत में मनोकामना पूर्ति के लिए भगवान शिव से प्रार्थना करें और पूजा के बाद शिव आरती और शिव चालीसा का पाठ अवश्य करें।
Sawan Somvar Vrat Vidhi 2022: कैसे करें सावन सोमवार का व्रत? जानें व्रत विधि
सावन सोमवार का व्रत रखना भक्तों के लिए लाभदायक माना गया है। इस दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। स्नान करने के बाद घर के मंदिर को साफ-सुथरा करके भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करें। भगवान शिव का स्मरण करते हुए व्रत रखने का संकल्प लें और पूरा दिन व्रत करें। इस दिन शिव मंदिर के दर्शन अवश्य करें और भगवान शिव या शिवलिंग का जलाभिषेक करें। शाम के समय भी पूजा आराधना करें। हो सके तो इस दिन दान-पुण्य भी करें।
Sawan Somvar 2022: कब-कब रखा जाएगा सावन सोमवार का व्रत?
सावन इस वर्ष 14 जुलाई से प्रारंभ हो गया है। सावन का पहला सोमवार व्रत कल यानी 18 जुलाई को रखा जाएगा। इस बार कुल चार सोमवारी का व्रत किया जाएगा। सावन का दूसरा सोमवार 25 जुलाई, तीसरा सोमवार 1 अगस्त और चौथा सोमवार 8 अगस्त को है।
Sawan Somwar 2022: सावन में इस बार पड़ेंगे कितने सोमवार?
सावन 2022 में कुल चार बार सोमवारी का व्रत रखा जाएगा। सावन सोमवार के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-आराधना की जाती है।
Sawan Somvar 2022: कब है सावन का पहला सोमवार?
सावन का पावन महीना 14 जुलाई से प्रारंभ हो गया है। सावन के महीने में पहले सोमवारी का व्रत 18 जुलाई 2022 को रखा जाएगा।
Sawan 2022: कब से शुरू हुआ सावन का पावन महीना?
वर्ष 2022 में सावन का महीना 14 जुलाई 2022, गुरुवार के दिन से प्रारंभ हुआ है। सावन मास की अंतिम तिथि 12 अगस्त 2022 शुक्रवार है।

