यहां विराजते हैं 'कुंवारों के देवता', दर्शन मात्र से बनते हैं शादी के योग

Kuwaron Ke Devta Ka Mandir Kaha Hai: मध्यप्रदेश में एक ऐसा मंदिर स्थित है, जहां कुंवारों के देवता विराजमान हैं। माना जाता है अगर किसी व्यक्ति की शादी नहीं हो रही हो तो वह इस मंदिर में दर्शन कर सकता है। इस मंदिर में दर्शन मात्र से शादी के योग बन जाते हैं। इस मंदिर में दूर-दूर से लोग दर्शन को आते हैं और अपनी झोली भरकर ही वापस जाते हैं। आइए जानते हैं कि इस मंदिर में दर्शन करने कैसे जाएं।

Kuwaron Ke Devta Ka Mandir Kaha Hai: मध्य प्रदेश के नीमच जिले में एक अनोखा धार्मिक स्थल है, जहां अविवाहित युवक-युवतियां अपनी विवाह की कामना लेकर पहुंचते हैं। यहां स्थापित बिल्लम बावजी को स्थानीय लोग 'कुंवारों के देवता' के रूप में पूजते हैं। भक्तों की गहरी आस्था है कि इनके दर्शन और पूजन से योग्य जीवनसाथी मिलता है और विवाह के योग शीघ्र बन जाते हैं। यह परंपरा दशकों से चली आ रही है, और अब यह स्थान आस्था का बड़ा केंद्र बन गया है। नीमच शहर से लगभग 18 किलोमीटर दूर जावद कस्बे की पुरानी धान मंडी क्षेत्र में यह देवस्थल स्थित है, जो श्री रिद्धि-सिद्धि गणपति मंदिर से जुड़ा हुआ है। यहां बिल्लम बावजी की चल मूर्ति विशेष अवधि में विराजमान की जाती है और दूर-दूर से लोग मनौती मांगने आते हैं। कई भक्तों का दावा है कि उनकी कामना यहां पूरी हुई और शादी हो गई।

kunwaro ke devta

यहां है कुंवारों के देवता का मंदिर

कब होते हैं बिल्लम बावजी के दर्शन?

यह परंपरा मुख्य रूप से होली के बाद रंगपंचमी से शुरू होती है और रंग तेरस तक चलती है। इस दिनबिल्लम बावजी की मूर्ति को गणपति मंदिर से निकालकर विधि-विधान से पूजा की जाता है और नगर भ्रमण कराए जाने के साथ ही और पुरानी धान मंडी क्षेत्र में गणेश मंदिर के पास निर्धारित स्थान पर विराजमान किया जाता है। यह अवधि लगभग 9 दिनों की होती है, इस दौरान अविवाहित युवक-युवतियां रोजाना पूजा करने आते हैं और विवाह की मनोकामना मांगते हैं। माता-पिता भी अपने बच्चों की शादी के लिए यहां आते हैं और मन्नत मांगते हैं।

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