Bhishma Ashtami 2023: जानिए भीष्म अष्टमी पर्व का महत्व और पूजन विधि

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 27, 2023, 04:03 PM IST

Bhishma Ashtami 2023 Puja: हर साल माघ महीने के शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि को भीष्म अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन व्रत रखने और पूजा-पाठ करने का विधान है। इस साल भीष्म अष्टमी का व्रत 28 जनवरी 2023 को है। मान्यता है कि इस दिन किए व्रत और पूजन से सौंदर्य और गुणवान संतान की प्राप्ति होती है।

KEY HIGHLIGHTS
  • माघ शुक्ल पक्ष की अष्टमी को होती है भीष्म अष्टमी
  • भीष्म अष्टमी के व्रत व पूजन से पितृदोष से मिलती है मुक्ति
  • योग्य व गुणवान संतान की प्राप्ति के लिए रखें भीष्म अष्टमी व्रत

Bhishma Ashtami 2023, Puja Vidhi and Importance: हिंदू धर्म में भीष्म पितामह से जुड़े कई व्रत किए जाते जाते हैं, इन्हीं में एक है भीष्म अष्टमी। धार्मिक कथाओं के अनुसार, माघ महीने में जब भीष्म पितामह बाणों से घायल हो गए थे, तो उन्होंने अपने प्राण त्यागने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार किया था। भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था। माघ महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को ही भीष्म पितामह ने अपने शरीर का त्याग किया था। इसलिए हर साल इस दिन को भीष्म अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस साल शनिवार 28 जनवरी 2023 को भीष्म अष्टमी पड़ रही है। जानते हैं भीष्म अष्टमी के महत्व और पूजा विधि के बारे में।

भीष्म अष्टमी महत्व (Bhishma Ashtami Significance)

मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक माघ शुक्ल पक्ष की अष्टमी को भीष्म अष्टमी का व्रत व पूजन करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है और व्रत के प्रभाव से उसे पितृदोष से भी मुक्ति मिलती है। इस दिन भीष्म पितामह के नाम से जल में तिल व कुश से श्राद्ध व तर्पण करने का महत्व है। साथ ही भीष्म अष्टमी का व्रत करने से योग्य संतान की प्राप्ति होती है। भीष्म अष्टमी के महत्व को लेकर धर्म ग्रंथों में कहा गया है-

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