भगवान राम को समर्पित किया जाएगा 286 किलो वजनी कोदंड, जानिए क्या है ये और क्यों है इतना खास

What Is Kodand: 22 जनवरी 2024 को अयोध्या राम मंदिर में रामलला की बाल स्वरूप प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी। अब लगभग 2 साल बाद रामलला की अनमोल धरोहर ‘कोदंड’ को उनको समर्पित किया जा रहा है। जी हां, ओडिशा के राउरकेला से प्रभु श्रीराम की वो विरासत आ रही है, जिसके माध्यम से उन्होंने रावण समेत कई राक्षसों से पृथ्वी को मुक्त किया था। आइए जानते हैं प्रभु राम की यह विरासत क्या है और क्यों खास है?

What Is Kodand: 22 जनवरी 2026 को अयोध्या एक बार फिर ऐतिहासिक और आध्यात्मिक साक्षी बनने जा रही है। भगवान श्रीराम से जुड़ी उनकी सबसे विशेष विरासत के रूप में ‘कोदंड’ आज अयोध्या पहुंच रहा है। कोदंड कोई साधारण धनुष नहीं है, बल्कि भगवान श्रीराम के धर्म, मर्यादा और न्याय के आदर्शों का प्रतीक है। अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर के लिए तैयार किया गया यह 286 किलोग्राम वजनी पंचधातु का भव्य कोदंड ओडिशा के राउरकेला से विशेष यात्रा के माध्यम से अयोध्या लाया गया है। यह यात्रा केवल एक वस्तु के स्थानांतरण की नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आस्था और इतिहास को जोड़ने वाली आध्यात्मिक यात्रा मानी जा रही है।

क्या है कोदंड और क्यो हैं ये खास

क्या है कोदंड और क्यो हैं ये खास?

कोदंड क्या है?

धर्मग्रंथों और रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम के धनुष का नाम कोदंड था। यही कारण है कि प्रभु श्रीराम को कोदंडधारी भी कहा जाता है। कोदंड सामान्य धनुष नहीं था, बल्कि एक चमत्कारी और दिव्य अस्त्र माना जाता था, जिसे कोई सामान्य योद्धा धारण नहीं कर सकता था। शास्त्रों के अनुसार, कोदंड का निर्माण बांस (बेंत) से हुआ था। देखने में सरल, लेकिन शक्ति में अद्वितीय यह धनुष धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश का प्रतीक था। रामचरितमानस में तुलसीदास जी ने कोदंड की शक्ति और उसकी महिमा का विस्तार से उल्लेख किया है। यह धनुष इतना शक्तिशाली था कि इससे छोड़ा गया बाण लक्ष्य को भेदकर ही लौटता था। राक्षसों और अधर्मी शक्तियों में कोदंड का नाम सुनते ही भय व्याप्त हो जाता था।

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