Ashadha Masik Durgashatmi 2026 Date Kab Hai (Parvati Jayanti 2026 Date): हिंदू धर्म में आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन मासिक दुर्गाष्टमी मनाई जाती है। और इसी के साथ ही पार्वती जयंती का पर्व भी आता है। मां पार्वती को जगत की जननी और आदिशक्ति का स्वरूप माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस पावन तिथि पर श्रद्धापूर्वक माता पार्वती की आराधना करने से जीवन के दुख दूर होते हैं।
आषाढ़ मास की दुर्गाष्टमी 2026 में कब मनाई जाएगी
आषाढ़ मास की मासिक दुर्गाष्टमी 2026 कब है
साल 2026 में पार्वती जयंती और आषाढ़ मास की मासिक दुर्गाष्टमी 21 जुलाई, मंगलवार को मनाई जाएगी। द्रिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल अष्टमी तिथि 21 जुलाई की सुबह शुरू होगी और 22 जुलाई की सुबह तक रहेगी। इसलिए व्रत और पूजन 21 जुलाई को किया जाएगा।
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पार्वती जयंती 2026 तिथि और समय
| पार्वती जयंती 2026 | तिथि और समय |
|---|---|
| पार्वती जयंती की तारीख | 21 जुलाई 2026, मंगलवार |
| अष्टमी तिथि प्रारंभ | 21 जुलाई को सुबह 4 बजकर 2 मिनट |
| अष्टमी तिथि समाप्त | 22 जुलाई को सुबह 5 बजकर 16 मिनट |
| मास | आषाढ़ |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
| पर्व | पार्वती जयंती और मासिक दुर्गाष्टमी |
पार्वती जयंती का धार्मिक महत्व
माता पार्वती को भगवान शिव की अर्धांगिनी होने के साथ संपूर्ण सृष्टि की पालनहार भी माना गया है। उन्हें प्रेम, शक्ति, ममता, समर्पण और सौभाग्य का प्रतीक माना गया है। देवी पार्वती का ही एक स्वरूप मां दुर्गा हैं। यही कारण है कि आषाढ़ शुक्ल अष्टमी पर पार्वती जयंती और मासिक दुर्गाष्टमी का संयोग इस दिन के धार्मिक महत्व को और बढ़ा देता है।
प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में देवी पार्वती को द्वादश सिद्धिविद्या देवियों में भी स्थान दिया गया है। तंत्र परंपरा में सिद्धिविद्या देवियों की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि सच्चे मन और विधिपूर्वक की गई यह उपासना साधक की मनोकामनाओं को पूरा करने वाली होती है।
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तीन प्रकार के दुख दूर करती हैं माता पार्वती
ज्योतिषाचार्य सुजीत महाराज के अनुसार, मनुष्य के जीवन में आने वाले दुख तीन प्रकार के माने गए हैं- आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक। सांसारिक अथवा भौतिक कारणों से मिलने वाला कष्ट आधिभौतिक दुख कहलाता है। दैवीय या प्राकृतिक कारणों से मिलने वाले कष्ट को आधिदैविक और अज्ञानता अथवा मन की अशांति से पैदा होने वाले कष्ट को आध्यात्मिक दुख कहा गया है।
मान्यता है कि माता पार्वती की सच्चे भाव से उपासना करने पर इन तीनों प्रकार के दुखों का प्रभाव कम होता है। माता अपने भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति, धैर्य और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।
पार्वती जयंती की पूजा विधि
पार्वती जयंती के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को साफ करके भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। माता को कुमकुम, अक्षत, लाल या सफेद फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। भगवान शिव को जल और बेलपत्र चढ़ाएं। इसके बाद धूप-दीप जलाकर शिव-पार्वती के मंत्रों का जप करें।
विवाहित महिलाएं माता पार्वती से अखंड सौभाग्य और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना कर सकती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं योग्य जीवनसाथी एवं सुखी भविष्य की कामना से माता की पूजा करती हैं। इस दिन जरूरतमंद महिलाओं को वस्त्र, फल या सुहाग की सामग्री दान करना भी शुभ माना जाता है।
