कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी 2026: भगवान गणेश के इस दुर्लभ रूप की क्यों होती है पूजा, आषाढ़ मास से क्या है इसका संबंध

हिंदू धर्म में भगवान गणेश के पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। गणेश जी को प्रथम पूज्य माना गया है। आषाढ़ मास की चतुर्थी तिथि के दिन गणेश जी के पूजन का विधान है। आइए जानते हैं इस दिन के पूजन के बारे में विस्तार से...

Krishnapingala Sankashti Chaturthi 2026: हिंदू धर्म में प्रत्येक संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित होती है, लेकिन आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का विशेष महत्व माना गया है। इस तिथि को 'कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी' के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश के कृष्णपिंगल स्वरूप की पूजा-अर्चना करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और साधक को बुद्धि, साहस तथा सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आषाढ़ मास आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन का समय माना जाता है। ऐसे में इस महीने आने वाली कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी का महत्व और भी बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कि भगवान गणेश (Lord Ganesha) के इस दुर्लभ स्वरूप की पूजा क्यों की जाती है और इसका आषाढ़ मास से क्या संबंध है।

Krishnapingala Sankashti Chaturthi 2026

कृष्णपिंगला संकष्टी चतुर्थी 2026

कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी 2026 कब है

द्रिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 3 जुलाई 2026 को सुबह 11:20 बजे होगा। यह तिथि 4 जुलाई 2026 को दोपहर 12:39 बजे समाप्त होगी। क्योंकि व्रत उदयातिथि के आधार पर रखा जाता है, इसलिए कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी का व्रत 3 जुलाई 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा।

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