Ahoi Ashtami Puja Vrat Paran Timing Today (13 October 2025): आज, 13 अक्टूबर 2025, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है, जिसे अहोई अष्टमी के रूप में मनाया जा रहा है। यह पवित्र पर्व माताओं के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह व्रत संतान की लंबी आयु, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए समर्पित है। माताएं इस दिन निर्जला उपवास रखकर माता अहोई और भगवान गणेश की पूजा करती हैं। व्रत का समापन सायंकाल में तारों को देखकर या कुछ क्षेत्रों में चंद्रमा को अर्घ्य देकर किया जाता है। आज दोपहर 1:44 बजे से पूजा और पारण की तैयारी शुरू हो चुकी है।
अहोई अष्टमी व्रत पारण विधि (Pic Credit- Canva)
अहोई अष्टमी 2025 का पारण समय
अहोई अष्टमी का व्रत सायंकाल में तारों को देखकर पूरा किया जाता है, जो प्रदोष काल के दौरान होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष अष्टमी तिथि 13 अक्टूबर 2025 को दोपहर 12:24 बजे शुरू हुई थी और यह 14 अक्टूबर 2025 को सुबह 11:09 बजे तक रहेगी। ऐसे में व्रत पारण का सबसे शुभ समय प्रदोष काल में होता है, जब तारे दिखाई देते हैं। आज के दिन प्रदोष काल शाम 5:53 बजे से 7:08 बजे तक है। वहीं, तारों को अर्घ्य देने का समय शाम 6:17 बजे से शुरू होगा। हालांकि कुछ क्षेत्रों में इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। आज के दिन चंद्रोदय 8 बजकर 47 मिनट पर होगा।
हालांकि अधिकांश क्षेत्रों में परंपरा तारों को अर्घ्य देने की है। यदि स्वास्थ्य कारणों से निर्जला व्रत कठिन हो, तो फलाहार या जल लिया जा सकता है, लेकिन पारण सायंकाल में ही करना चाहिए। यह समय माता अहोई की कृपा प्राप्त करने और संतान के कल्याण की प्रार्थना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
अहोई अष्टमी पारण की विधि
पारण से पहले पूजा अवश्य पूरी करें। पूजा स्थल पर अहोई माता और गणेश जी का चित्र या मूर्ति स्थापित करें। साही और उसके बच्चों का चित्र स्याही या काजल से बनाएं। दीपक जलाएं, धूप दिखाएं और रोली, चंदन, फूल, अक्षत से पूजा करें। अहोई अष्टमी की कथा और गणेश जी की कथा सुनें। प्रसाद के रूप में 8 पूरियां, 8 पुए, हलवा, चने की दाल और गणेश जी के लिए मोदक अर्पित करें। यह पूजा प्रदोष काल शाम 5:53 बजे से शुरू करें। शाम 6:17 बजे के बाद, घर की छत या आंगन में पूर्व दिशा की ओर मुख करें। एक थाली में जल, चंदन और एक फूल लें। तारों को देखते हुए जल अर्घ्य दें और प्रार्थना करें कि 'हे माता अहोई, मेरी संतान की रक्षा करें। मेरे व्रत को स्वीकार करें और मेरे परिवार को सुख-शांति दें।' पूजा के बाद अहोई माता और गणेश जी की आरती करें।
ऐसे करें पारण
तारों को अर्घ्य देने के बाद, व्रत खोलने के लिए हलवा, पूरी या मिठाई ग्रहण करें। पानी या दूध से व्रत खोलना भी शुभ माना जाता है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
