Aamir Khan Wedding 2026 : बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान आज 5 जुलाई 2026 को अपनी गर्लफ्रेंड गौरी स्प्रैट के साथ तीसरी बार शादी के बंधन बंध रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों का विवाह मुंबई स्थित आमिर खान के घर पर बेहद निजी समारोह में होगा और इसमें सिर्फ परिवार व करीबी दोस्त शामिल हुए हैं। बताया जा रहा है कि यह एक रजिस्टर्ड मैरिज है।
एक-दूजे के हुए आमिर-गौरी
आमिर खान के विवाह की खबरों के बीच एक सवाल भी चर्चा में है कि क्या इस्लाम के सबसे पवित्र महीनों में से एक माह-ए-मुहर्रम में निकाह करना जायज है? आमिर खान सुन्नी मुस्लिम हैं, ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इस्लामिक मान्यताओं में मुहर्रम के दौरान शादी को लेकर क्या नियम बताए गए हैं।
क्या है माह-ए-मुहर्रम
मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर (हिजरी) का पहला महीना होता है और इसे चार पवित्र महीनों में शामिल किया गया है। साल 2026 में हिजरी 1448 के अनुसार मुहर्रम की शुरुआत 16 जून से हुई है। इस महीने की 10वीं तारीख को यौम-ए-आशूरा मनाया जाता है, जो इस वर्ष 25 जून 2026 को पड़ा था। यह दिन विशेष रूप से इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में मनाया जाता है।
मुहर्रम में शादी करना जायज है या नहीं
इस्लामिक विद्वानों के अनुसार कुरान में कहीं भी मुहर्रम के महीने में निकाह करने पर रोक नहीं लगाई गई है। इसी तरह प्रामाणिक हदीसों में भी ऐसा कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिलता कि मुहर्रम में शादी करना हराम या नाजायज है। यानी शरीयत के अनुसार यदि सभी निकाह की शर्तें पूरी होती हैं, तो मुहर्रम के महीने में भी निकाह किया जा सकता है। इसलिए धार्मिक दृष्टि से मुहर्रम में शादी करना निषिद्ध नहीं माना जाता है।
मुस्लिम मुहर्रम में निकाह क्यों नहीं करते हैं
हालांकि इस्लाम में इसकी मनाही नहीं है, लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप समेत कई देशों में सामाजिक और धार्मिक परंपराओं के कारण बड़ी संख्या में मुस्लिम परिवार मुहर्रम के दौरान शादी या अन्य जश्न वाले कार्यक्रम आयोजित नहीं करते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह कर्बला की घटना है। इस महीने में खासकर आशूरा के बाद शिया समुदाय इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत का गम मनाता है। कई स्थानों पर चेहल्लुम (अरबईन) तक शोक का वातावरण रहता है। ऐसे में उत्सव, संगीत और दावत जैसे कार्यक्रमों से लोग परहेज करते हैं।
सुन्नी और शिया समुदाय की हैं अलग-अलग मान्यताएं
सुन्नी और शिया दोनों समुदाय मुहर्रम को सम्मान और इबादत का महीना मानते हैं, लेकिन इसकी परंपराओं में कुछ अंतर देखने को मिलता है। सुन्नी मुस्लिम इस महीने में विशेष रूप से रोजा रखने, दुआ करने, सदका देने और अल्लाह की इबादत पर जोर देते हैं। वहीं, शिया समुदाय के लिए यह महीना कर्बला की शहादत की याद में शोक का समय होता है। यही कारण है कि शिया समुदाय में मुहर्रम के दौरान शादी और अन्य खुशी के कार्यक्रम आमतौर पर नहीं किए जाते हैं।
