आज नवरात्रि का कौन सा दिन है, 27 मार्च 2026 (Navratri Day Today 27 March): आज चैत्र नवरात्रि अपने विश्राम की ओर हैं, आज पावन नवरात्र का अंतिम दिन है, जिसे नवमी कहा जाता है। इन 9 दिनों में लोगों ने पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ माता का पूजन और व्रत किया है। नवरात्रि के 9 दिनों में हर एक दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप के लिए समर्पित होता है। माता के इन सभी स्वरूपों का भक्त पूरी श्रद्धा के साथ पूजन करते हैं। आज कन्या पूजन के साथ नवरात्रि व्रत का पारण हो जाएगा। आइए जानते हैं आज नवमी है या दशमी। यहां से नोट करें आज के नवरात्र की पूजन का शुभ रंग और पूजा विधि।
आज क्या है आज कौन सी माता का दिन है
आज नवमी है या दशमी
हिन्दू पंचांग या कैलेंडर के अनुसार आज की उदया तिथि नवमी है जो 10 बजकर 09 मिनट तक रहेगी। इसके बाद अगली तिथि दशमी शुरू हो जाएगी। लेकिन चूंकि राम जन्म दोपहर के समय हुआ था, इसलिए कुछ लोग आज दिन भर नवमी तिथि को ही मनाएंगे।
आज की नवरात्री पर कौनसी माता की पूजा होगी
आज नवरात्रि की नवमी तिथि (महानवमी) है। इस दिन माता दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री को ज्ञान, पूर्णता और सभी सिद्धियों की देवी माना जाता है। इसके अलावा आज के दिन भगवान राम का पूजन भी किया जाता है। क्योंकि आज के दिन त्रेतायुग में भगवान का अवतरण भी भूलोक में हुआ था।
आज की नवरात्रि का कौन सा रंग है
नवरात्रि के अंतिम या नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इसके साथ ही इस दिन मैरून और लाल रंग के वस्त्र पहनना काफी शुभ माना जाता है। इस रंग को सकारात्मकता और शुभता का प्रतीक माना जाता है।
आज के नवरात्र (27 मार्च 2026) की पूजा विधि और भोग
चैत्र नवरात्रि का नौवां दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित होता है। यह नवरात्रि का अंतिम और अत्यंत महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर भक्तों को सिद्धि, सफलता, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। कई घरों में इस दिन कन्या पूजन (कंजक) और हवन भी किया जाता है।
आज के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थान को साफ कर गंगाजल से शुद्ध करें और मां सिद्धिदात्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। अब विधिपूर्वक दीपक जलाएं और माता को फूल, रोली, चंदन, अक्षत और फल अर्पित करें। पूजा के दौरान मां को प्रसन्न करने के लिए ध्यानपूर्वक उनका ध्यान करें और श्रद्धा भाव से पूजन करें। अंत में माता की आरती करें और परिवार की सुख-शांति की कामना करें।
नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री को हलवा, पूरी और चने का भोग लगाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसके साथ ही नारियल और फल भी अर्पित किए जा सकते हैं। कन्या पूजन के दौरान छोटी कन्याओं को यह प्रसाद खिलाकर उनका आशीर्वाद लेना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
नौवें नवरात्र की कथा (मां सिद्धिदात्री की कथा)
चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन पूजी जाने वाली मां सिद्धिदात्री की कथा अत्यंत पवित्र और दिव्य मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां सिद्धिदात्री वह देवी हैं जो अपने भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियां (आध्यात्मिक शक्तियां) प्रदान करती हैं। पुराणों के अनुसार, जब सृष्टि का आरंभ हुआ, तब भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने देवी की आराधना की। तब मां आदिशक्ति ने अपने नवम स्वरूप मां सिद्धिदात्री के रूप में प्रकट होकर देवताओं को अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व जैसी आठ महान सिद्धियां प्रदान कीं।
कहा जाता है कि भगवान शिव ने भी मां सिद्धिदात्री की कठोर उपासना की थी। मां की कृपा से ही उन्हें ये सभी सिद्धियां प्राप्त हुईं और वे अर्धनारीश्वर स्वरूप में स्थापित हुए, जिसमें उनका आधा शरीर देवी का माना जाता है। मां सिद्धिदात्री कमल पर विराजमान रहती हैं और उनके चार हाथों में चक्र, गदा, शंख और कमल सुशोभित होते हैं। उनका स्वरूप अत्यंत शांत, दिव्य और भक्तों के लिए कल्याणकारी है। उनकी आराधना से जीवन में सफलता, ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मां सिद्धिदात्री की आरती
जय सिद्धिदात्री मां तू सिद्धि की दाता।
तू भक्तों की रक्षक, तू जग की विधाता॥
तेरे नाम से मिलता सुख अपार।
दूर हो जाते सारे कष्ट और भार॥
कमलासन पर विराजे तू भवानी।
तेरी महिमा गाते देव और ज्ञानी॥
शंख, चक्र, गदा और कमल धारी।
करती कृपा तू जग की पालनहारी॥
जो कोई श्रद्धा से ध्यावे।
मनवांछित फल वह पावे॥
भक्तों के संकट हरने वाली।
सुख-समृद्धि देने वाली निराली॥
जय सिद्धिदात्री मां जय जय।
करो कृपा सब पर अंबे जय॥
