aaj kya hai 10 march 2026, आज शीतला सप्तमी है क्या (Is Sheetla Saptami Today): हिंदू पंचांग के अनुसार 10 मार्च 2026, मंगलवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। इस दिन चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पड़ रही है। कई क्षेत्रों में आज माता शीतला की पूजा और व्रत भी किया जाता है, जिसे शीतला सप्तमी कहा जाता है। पंचांग के अनुसार सप्तमी तिथि का आरंभ 9 मार्च 2026 को दोपहर लगभग 02:57 बजे से हो चुका था और यह तिथि 10 मार्च 2026 को शाम 05:24 बजे तक रहेगी। इसलिए आज के दिन सुबह से ही सप्तमी तिथि का प्रभाव रहेगा और श्रद्धालु शीतला माता की पूजा कर सकते हैं।
आज 10 मार्च 2026 की तिथि , व्रत और वार
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन माता शीतला की पूजा करने से घर-परिवार में सुख-शांति आती है और रोग-व्याधियों से रक्षा होती है।
आज 10 मार्च 2026 की तिथि और वार
10 मार्च 2026 को मंगलवार है और तिथि चैत्र कृष्ण सप्तमी रहेगी। आज का पर्व / व्रत शीतला सप्तमी है। आज सूर्योदय लगभग 06:44 बजे हुआ है और सूर्यास्त लगभग 06:30 बजे होगा। पंचांग के अनुसार इस दिन अनुराधा नक्षत्र का प्रभाव भी रहेगा, जो दिन के धार्मिक कार्यों और पूजा-पाठ के लिए शुभ माना जाता है।
क्या आज 10 मार्च 2026 को शीतला सप्तमी है?
हां, 10 मार्च 2026 को शीतला सप्तमी मनाई जा रही है। यह व्रत शीतला अष्टमी से एक दिन पहले आता है और कई स्थानों पर इसी दिन माता शीतला की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन शीतला माता की आराधना करने से चेचक, बुखार और अन्य संक्रामक रोगों से रक्षा होती है। ग्रामीण और पारंपरिक परिवारों में इस दिन विशेष रूप से माता को ठंडा भोग लगाया जाता है।
आज 10 मार्च 2026 को खाना कब बनाना है
10 मार्च 2026, मंगलवार को चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर शीतला सप्तमी का व्रत रखा जा रहा है। माता शीतला की पूजा का संबंध विशेष रूप से स्वास्थ्य और रोगों से मुक्ति की कामना से जुड़ा है। इस दिन की सबसे खास परंपरा है ठंडे भोजन का भोग। अगर आप शीतला अष्टमी का व्रत करते हैं तो आज रात को ही हलवा, पूरी, चना, आदि का भोग बनाकर तैयार कर लें।
शीतला सप्तमी का धार्मिक महत्व
शीतला सप्तमी का संबंध स्वास्थ्य और रोग निवारण से जोड़ा जाता है। शास्त्रों के अनुसार माता शीतला को रोगों की देवी माना गया है। उनकी पूजा से घर में फैली नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और परिवार के सदस्य स्वस्थ रहते हैं। इस दिन कई जगहों पर एक दिन पहले बना हुआ भोजन यानी बासी या ठंडा प्रसाद माता को अर्पित किया जाता है। इसे बसोड़ा या बसौड़ा की परंपरा से भी जोड़ा जाता है। श्रद्धालु सुबह स्नान कर माता शीतला की पूजा करते हैं, दीपक जलाते हैं और परिवार की कुशलता की कामना करते हैं।
