Margashirsha Purnima Vrat Katha: मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत कथा, पढ़ें महर्षि अत्रि और माता अनुसूया की कहानी

Margashirsha Purnima Vrat Katha (मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत कथा): आज मार्गशीर्ष पूर्णिमा का शुभ दिन है। ये दिन दत्तात्रेय जयंती और देवी अन्नपूर्णा जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। आज के दिन पूजा-पाठ के साथ कथा पढ़न का भी विधान है। यहां से आप मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा की व्रत कथा पढ़ सकते हैं।

Margashirsha Purnima Vrat Katha (मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत कथा): मार्गशीर्ष पूर्णिमा की कथा अनुसार, महर्षि अत्रि और उनकी पत्नी अनुसूया महान तपस्वी और धर्मपरायण थे। महर्षि अत्रि अपने तप और योग बल के कारण सभी में बहुत सम्मानित थे और उनकी पत्नी अनुसूया भी अपनी पतिव्रता और सतीत्व के लिए काफी प्रसिद्ध थीं।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत कथा (pic credit: canva)

एक दिन उनकी महान तपस्या और सद्गुणों से प्रभावित होकर त्रिदेव ने उनकी परीक्षा लेने का निर्णय लिया। त्रिदेव भिक्षुकों के रूप में माता अनुसूया के आश्रम में पहुंचे और उन्होंने उनसे भोजन की याचना की। लेकिन उन्होंने ये रखी कि माता अनुसूया को उन्हें निर्वस्त्र होकर भोजन कराना होगा। अनुसूया ने अपने सतीत्व और तपबल से उन तीनों को छोटे बच्चों में बदल दिया और फिर उन्हें निर्वस्त्र होकर भोजन कराया।

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