Mokshada Ekadashi Vrat Katha: मोक्षदा एकादशी व्रत कथा, यहां पढ़ें वैखानस राजा और मुनि की कहानी

Mokshada Ekadashi Vrat Katha (मोक्षदा एकादशी व्रत कथा): सनातन धर्म में मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी का खास महत्व है। आज मोक्षदा एकादशी का खास दिन है और आज के दिन पूजा-पाठ के साथ व्रत कथा भी पढ़ी जाती है। यहां से आप मोक्षदा एकादशी की व्रत कथा और कहानी देख सकते हैं।

Mokshada Ekadashi Vrat Katha (मोक्षदा एकादशी व्रत कथा): मोक्षदा एकादशी की कथा अनुसार गोकुल नाम के नगर में वैखानस नामक राजा राज्य करता था। उसके राज्य में चारों वेदों के ज्ञाता ब्राह्मण रहते थे। राजा अपनी प्रजा का अच्छे से पालन करता था। एक दिन रात में राजा ने सपने में देखा कि उसके पिता नरक में दुख भोग रहें हैं। ये देख उसे बड़ा आश्चर्य हुआ। सुबह उसने विद्वान ब्राह्मणों को ये सपना सुनाया। राजा ने कहा- हे ब्राह्मण देवताओं! इस दु:ख के कारण मेरा सारा शरीर जल रहा है। अब आप कृपा करके कोई तप, दान, व्रत आदि ऐसा उपाय बताइए जिससे मेरे पिता को मुक्ति मिल जाए। ब्राह्मणों ने कहा- हे राजन! यहां पास में ही पर्वत ऋषि का आश्रम है। वे आपकी समस्या का हल जरूर करेंगे।

ऐसा सुनकर राजा मुनि के आश्रम में गये। राजा ने मुनि को साष्टांग दंडवत किया। मुनि ने राजा से सांगोपांग कुशल पूछी। राजा ने कहा कि महाराज आपकी कृपा से मेरे राज्य में सब कुशल हैं, लेकिन एक रात्रि में दिखे सपने से मेरे चित्त में अत्यंत अशांति होने लगी है। ऐसा सुनकर पर्वत मुनि ने आंखें बंद की और भूत विचारने लगे। मुनि ने राजा को बताया कि मैंने योग के बल से तुम्हारे पिता के कुकर्मों को जान लिया है। उन्होंने अपने पिछले जन्म में कामातुर होकर एक पत्नी को रति दी किंतु सौत के कहने पर दूसरे पत्नी को ऋतुदान मांगने पर भी नहीं दिया। इसी पापकर्म के कारण तुम्हारे पिता नर्क में कष्ट भोग रहे हैं।

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