Aaj Ka Panchang 5 April 2025 (आज का पंचांग 5 अप्रैल 2025): चैत्र नवरात्रि का पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार वसंत ऋतु में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है, जिसमें मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इनमें अष्टमी तिथि का विशेष महत्व है, जिसे दुर्गाष्टमी कहा जाता है। ये दिन मां दुर्गा के 8वें स्वरूप मां महा गौरी की आराधना के लिए समर्पित होता है। अष्टमी तिथि के दिन भक्त उपवास रखते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और कन्या पूजन कर उन्हें भोजन कराकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पंचांग की दृष्टि से, अष्टमी तिथि पर विशेष मुहूर्त, शुभ योग, नक्षत्र, चंद्र राशि और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय अत्यंत ही महत्वपूर्ण होता है। इन तत्वों के आधार पर पूजा-पाठ और हवन का आयोजन किया जाता है ताकि माता रानी की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहे। मान्यता है कि यदि अष्टमी के दिन शुभ मुहूर्त में पूजा की जाए, तो विशेष फल की प्राप्ति होती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आज की तिथि से जुड़ी अधिक जानकारी को जानने के लिए यहां देखें 5 अप्रैल 2025 पंचांग।
Aaj Ka Panchang 5 April 2025
आज का पंचांग 5 अप्रैल 2025 (Aaj Ka Panchang 5 April 2025)
- संवत - पिङ्गला विक्रम संवत 2082
- माह -चैत्र, कृष्ण पक्ष,
- तिथि - चैत्र माह शुक्ल पक्ष अष्टमी 07:27 पी.एम तक फिर नवमी
- पर्व - नवरात्र अष्टमी
- दिवस - शनिवार
- सूर्योदय - 06:09 ए.एम सूर्यास्त - 6:39 पी.एम
- नक्षत्र - पुनर्वसु
- चंद्र राशि - मिथुन, स्वामी-बुध 11:26 पी.एम तक फिर कर्क, स्वामी-चंद्रमा
- सूर्य राशि - मीन, स्वामी ग्रह-गुरु
- करण - विष्टि 07:43 ए.एम तक फिर बव
- योग - अतिगण्ड 08:03 पी.एम तक फिर सुकर्मा
आज के शुभ मुहूर्त
- अभिजीत - 12:01 पी.एम से 12:50 पी.एम तक
- विजय मुहूर्त - 02:23 पी.एम से 03:26 पी.एम तक
- गोधुली मुहूर्त - 06:22 पी.एम से 07:22 पी.एम तक
- ब्रह्म मुहूर्त - 4:03 ए.एम से 05:09 ए.एम तक
- अमृत काल - 06:03 ए.एम से 07:44 ए.एम तक
- निशीथ काल मुहूर्त - रात 11:43 से 12:25 तक
- संध्या पूजन - 06:30 पी.एम से 07:05 पी.एम तक
दिशा शूल - पश्चिम दिशा। इस दिशा में यात्रा से बचें। दिशा शूल के दिन उस दिशा की यात्रा करने से बचते हैं, यदि आवश्यक है तो एक दिन पहले प्रस्थान निकालकर फिर उसको लेकर यात्रा करें।
अशुभ मुहूर्त - राहुकाल - सायंकाल 04:30 बजे से 06:00 बजे तक।
क्या करें - चैत्र नवरात्र का पवित्र समय चल रहा है। आज अष्टमी है।अष्टमी व्रत अवश्य रहें। अष्टमी पूजा का बहुत महत्व है। माता दुर्गा जी की उपासना करें। ये व्रत, उपासना व शक्ति पूजा का पुण्य काल है। नित्यप्रतिदिन दुर्गासप्तशती का पाठ करें। माता जगदंबा को समर्पित ये महान उपवास शक्ति उपासना का पुनीत अवसर है। मन में हर पल माता दुर्गा के किसी भी नाम का जप करें। नियम पूर्वक व्रत व दान -पुण्य करना बहुत फलित होता है। शिव मंदिर परिसर में बेल, बरगद ,आम, पाकड़ व पीपल का पेड़ लगाएं। अपने घर के मंदिर में अखण्ड दीप जलाइए। दुर्गासप्तशती का नित्य पाठ करें। सिद्धिकुंजिकास्तोत्र का 09 पाठ अवश्य करें। माता दुर्गा के 32 व 108 नामों का जप करें। सप्तश्लोकी दुर्गा का नियमित 09 पाठ करें। ब्रम्ह मुहूर्त में श्री रामरक्षास्तोत्र का पाठ बहुत फलदायी है। कलश स्थापना वाले घरों में नित्य दुर्गासप्तशती का पाठ व अखण्ड दीपक जलाना श्रेयस्कर है। माता दुर्गा की भक्ति प्राप्त करने के लिए सिद्धिकुंजिकास्तोत्र का पाठ अत्यंत आवश्यक है। इस समय मन का सात्विक होना बहुत आवश्यक है। मंदिर में कीर्तन व फलाहार कराएं। माता दुर्गा मंदिर में माता की प्रतिमा की एक परिक्रमा करें। नारियल व लौंग माता को बहुत प्रिय है।
क्या न करें - असत्य से दूर रहें।
