रमज़ान का महीना बहुत बरकतों वाला माना जाता है। इसे रहमत (मेहरबानी), मग़फिरत (गुनाहों की माफी) और जहन्नम से निजात का महीना कहा जाता है। माना जाता है कि रोज़ा रखने वाले की दुआ इफ्तार के समय खास तौर पर कबूल होती है। इसलिए जब रोज़ा खोलें, तो अल्लाह का शुक्र अदा करें और अपने लिए, अपने परिवार के लिए और पूरी उम्मत के लिए दुआ करें। यहां आप आज पहले रोज़े का इफ्तार समय जान सकते हैं। साथ ही इफ्तार की दुआ, रोज़े की नियत और उससे जुड़े जरूरी नियमों की जानकारी भी पा सकते हैं।
आज का इफ्तार कितने बजे है, शहर अनुसार समय (Roza Iftar Timing Today)-
| दिल्ली | 6:16 PM |
| नोएडा | 6:16 PM |
| लखनऊ | 6:03 PM |
| पटना | 5:46 PM |
| हैदराबाद | 6:21 PM |
| मुंबई | 6:52 PM |
| जयपुर | 6:23 PM |
| पुणे | 6:37 PM |
| बेंगलुरू | 6:28 PM |
| इंदौर | 6:27 PM |
इफ्तार करने की दुआ, रोजा खोलने की दुआ हिंदी में (Roza Kholne Ki Dua in Hindi)-
अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुमतु,व-बिका आमन्तु,व-अलयका तवक्कालतू,व अला रिज़किका अफतरतू।
अर्थ- हे अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोज़ा रखा, तुझ पर ईमान लाया और तुझ पर भरोसा किया और तेरी दी हुई रोजी से रोज़ा खोला।
इफ्तार की दुआ इंग्लिश में (Roza Kholne Ki Dua in English)-
Allahumma inni laka sumtu wa bika aamantu wa ‘alayka tawakkaltu wa ‘ala rizq-ika-aftartu
Meaning- O Allah! I fasted for You, I believe in You, I trust in You and with Your sustenance I break my fast.
अरबी में रोज़ा खोलने की दुआ (Roza Kholne Ki Dua in Arabic)-
اللَّهُمَّ إِنِّي لَكَ صُمْتُ وَبِكَ آمَنْتُ وَعَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ وَعَلَى رِزْقِكَ أَفْطَرْتُ
रोज़ा खोलने की नियत-
इफ्तार के दौरान रोज़ा खोलने की नियत की जाती है, जिसमें रोज़ेदार अल्लाह की रज़ा के लिए खास दुआ पढ़ता है और रोज़ा खोलता है। यह नियत पहले से नहीं की जाती, क्योंकि अगर कोई व्यक्ति इफ्तार से पहले ही रोज़ा खोलने की नियत कर ले, तो उसका रोज़ा अमान्य हो सकता है और पूरे दिन की इबादत व्यर्थ हो जाती है। इसलिए, सही तरीका यह है कि रोज़ा खोलते समय ही नियत की जाए और इफ्तार की दुआ पढ़कर रोज़ा खोला जाए, ताकि अल्लाह की रहमत और बरकत प्राप्त हो सके।
इफ्तार करने का तरीका-
सूर्य ढलते ही यानी मग़रिब की अज़ान होते ही इफ्तार करना सुन्नत है और समय पर करना ज़रूरी है। सुन्नत का पालन करते हुए खजूर या सादे पानी से रोज़ा खोलना सबसे बेहतर माना गया है। बिस्मिल्लाह पढ़ें और रोजा खोलते समय यह दुआ पढ़ें- 'अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुम्तु, व बिका आमन्तु, व अलैका तवक्कल्तु, व अला रिज़्किका अफ़्तरतु'। इफ्तार के समय ही रोज़ा खोलने की नियत (इरादा) करनी चाहिए। फिर फल, शरबत जैसा हल्का भोजन ही करना चाहिए। इफ्तार के तुरंत बाद या थोड़ी देर बाद ही मग़रिब की नमाज़ अदा करना चाहिए।
