Aaj Jumme Ki Namaz Ka Time: इस्लाम में जुमे का दिन सबसे अफजल माना जाता है। हजरत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया कि, जुमे का दिन तमाम दिनों का सरदार है। इसे ईद की तरह की विशेष माना जाता है। वहीं जुमा जब रमजान में पड़े तो उसकी फज़ीलत और अधिक बढ़ जाती है। ऐसा माना जाता है कि, जुमे के दिन की गई दुआएं खास कबूल होती हैं और अल्लाह बंदे के गुनाहों की मगफिरत करते हैं। यहां से आज जान सकते हैं आज रमजान के दूसरे रोजे पर जुमे की नमाज कितने बजे होने वाली है। साथ ही यहां जुमे की नमाज की रकात, दुआ, नियत और नमाज करने का तरीका भी विस्तार में बताया गया है।
जुमे की नमाज का समय (pc: canva)
आज जुमे की नमाज का समय-
जुमे की नमाज आमतौर पर दोपहर के समय में अदा की जाती है। हालांकि अलग-अलग शहरों के मस्जिदों में जुमे की नमाज के समय में थोड़ा बहुत अंतर होता है। ज्यादातर मस्जिदों में जुमे का खुतबा लगभग 12:15 बजे से 12:45 बजे के बीच होता है। वहीं नमाज 12:45 से 1:30 बजे के बीच अदा की जाती है। आप जुमे की नमाज की सटीक समय के लिए अपने शहर के स्थानीय मस्जिद या फिर इमाम साहब से सटीक समय की जानकारी भी ले सकते हैं।
जुमे की नमाज में कितनी रकात होती है?
रमज़ान के जुमे की नमाज़ में रकातों की संख्या वही होती है जो साल के बाकी जुमों में होती है, इसमें कोई बदलाव नहीं होता। जुमे की नमाज़ में 2 रकात फ़र्ज़ होती हैं जो जमाअत के साथ पढ़ी जाती हैं और यही असली अनिवार्य हिस्सा है। इसके अलावा आमतौर पर 4 रकात सुन्नत फ़र्ज़ से पहले और 2 रकात सुन्नत फ़र्ज़ के बाद पढ़ी जाती हैं और कुछ लोग बाद में 2 रकअत नफ़्ल भी पढ़ते हैं। इस तरह कुल मिलाकर अक्सर 12 रकात अदा की जाती हैं, लेकिन फर्ज़ केवल 2 रकअत ही हैं। रमज़ान में सिर्फ़ रात की तरावीह नमाज होती है, जुमे की रकअतों में कोई बढ़ोतरी नहीं होती।
जुमे की नमाज की दुआ-
- दुरूद शरीफ़
اللّٰهُمَّ صَلِّ عَلٰى مُحَمَّدٍ وَّعَلٰى آلِ مُحَمَّدٍ
ऐ अल्लाह! मुहम्मद और उनकी आल पर रहमत भेज।
- اللّٰهُمَّ اغْفِرْ لِي وَلِوَالِدَيَّ وَلِلْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ
ऐ अल्लाह! मुझे, मेरे वालिदैन को और तमाम मोमिन मर्दों और औरतों को माफ़ फ़रमा।
- رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَّفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَّقِنَا عَذَابَ النَّارِ
ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भलाई दे और आख़िरत में भलाई दे और हमें जहन्नम के अज़ाब से बचा।
जुमे की नमाज की नियत कैसे करें?
जुमे की नमाज़ की नियत दिल से की जाती है, उसे ज़ुबान से कहना ज़रूरी नहीं होता। जब आप जुमे की नमाज़ पढ़ने के लिए खड़े हों तो दिल में यह इरादा करें कि मैं अल्लाह के लिए जुमे की फ़र्ज़ नमाज़ इमाम के पीछे पढ़ रहा हूं, मेरा रुख काबा की तरफ है। बस इतना इरादा होना काफी है। जुमे की नमाज़ दो रकअत फ़र्ज़ होती है जो इमाम के साथ अदा की जाती है, और नमाज़ से पहले ख़ुत्बा सुनना भी ज़रूरी होता है। नियत का मतलब केवल दिल में पक्का इरादा करना है कि आप जुमे की फ़र्ज़ नमाज़ अल्लाह की रज़ा के लिए अदा कर रहे हैं।
जुमे की नमाज का तरीका-
जुमे की नमाज़ अदा करने का तरीका इस प्रकार है- सबसे पहले ग़ुस्ल करें, साफ कपड़े पहनें और मस्जिद समय से पहुंचें। नमाज़ से पहले इमाम दो ख़ुत्बे देते हैं, जिन्हें ध्यान से सुनना ज़रूरी है। खामोशी से ख़ुत्बा सुनने के बाद इमाम के पीछे दो रकअत फ़र्ज़ नमाज़ अदा करें, जिसमें नियत दिल में करें कि आप जुमे की फ़र्ज़ नमाज़ अल्लाह की रज़ा के लिए पढ़ रहे हैं। नमाज़ में तकबीर-ए-तहरीमा कहकर हाथ बांधें, रुकू और सज्दा इमाम के साथ करें। दूसरी रकअत के बाद तशह्हुद, दुरूद और दुआ पढ़कर इमाम के सलाम से नमाज़ पूरी करें। इसके बाद 4 रकअत सुन्नत, 2 रकअत सुन्नत और 2 रकअत नफ़्ल पढ़ी जा सकती हैं।
