पाकिस्तान में एक ऐसा पौराणिक शिव मंदिर है जो करीब 900 साल पुराना बताया जाता है। ये मंदिर पाकिस्तान के कटसराज नाम के स्थान पर मौजूद है। इस मंदिर को लेकर ऐसी मान्यता है कि माता सती की मृत्यु के बाद उनके वियोग में भगवान शिव यहां आकर पहली बार रोये थे। बता दें कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं के लिए ये मंदिर एक बड़े आस्था और विश्वास का केंद्र है। जानिए इस मंदिर का इतिहास।
पाकिस्तान में स्थित है भगवान शिव का ये प्राचीन मंदिर
मंदिर का धार्मिक महत्व: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पाकिस्तान के कटस में स्थित ये मंदिर असल में वही जगह है जहां माता सती के आत्मदाह करने के बाद उनके वियोग में भगवान शिव पहली बार रोये थे। पौराणिक कथाओं अनुसार माता सती ने अपने पिता दक्ष द्वारा शिव जी का अपमान होता देख हवन कुंड में आत्मदाह कर लिया था। सती का वियोग भगवान शिव बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे। इस दुख से मुक्ति पाने के लिए वो कटस नाम की एक जगह पर पहुंचे जहां उन्होंने अपने आंसुओं को बहने दिया। मान्यताओं अनुसार शिव के बहते आंसुओं से दो कुंड का निर्माण हुआ। पहला पाकिस्तान के कटस में स्थित कटाक्ष कुंड और दूसरा राजस्थान के पुष्कर स्थित कुंड।
कटस मंदिर की विशेषता: पाकिस्तान के कटस मंदिर के कटाक्ष कुंड का पानी दो रंगों में दिखाई पड़ता है। कुंड की शुरुआत में हरे रंग का पानी और ज्यादा गहराई में जाने पर नीले रंग का पानी दिखाई देता है। हालांकि इस मंदिर के निर्माण को लेकर कोई सही प्रमाण तो नहीं मिल पाया है लेकिन ये मंदिर आज भी लोगों की आस्था और विश्वास का केंद्र बना हुआ है।Puja Path Tips: ईश्वर की पाना चाहते हैं कृपा तो पूजा के समय इन 10 नियमों का जरूर करें पालन
इस जगह को लेकर ऐसी मान्यता है कि यहां अपने 12 साल के वनवास के दौरान पांडव भी रहे थे। ऐसा कहा जाता है कि कई वनों में भटकने के दौरान जब पांडवों को प्यास लगी तो वो इसी कटाक्ष कुंड में गये थे।
