Aaj Dev Uthane Ka Samay: चार महीनों (चातुर्मास) तक भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में रहते हैं। देवउठनी एकादशी के दिन विष्णुजी के जागने के साथ सभी शुभ कार्यों का आरंभ फिर से संभव होता है। यानी आज के बाद से ही विवाह, गृहप्रवेश, यज्ञ सभी शुभ काम होंगे। कहते हैं जो लोग देवउठनी एकादशी का व्रत करते हैं, उन्हें वैकुंठधाम की प्राप्ति होती है। यहां से आप जान सकते हैं कि आज की पूजा के बाद देव उठाने का सही समय क्या है।
देवउठनी एकादशी पर देव उठाने का समय 2025 (pic credit: canva)
आज देवउठनी एकादशी पर देव उठाने का समय-
आज 1 नवंबर को देव उठाने के लिए शुभ समय सुबह 9 बजकर 12 मिनट का है। इसके अलावा गोधूलि काल में एकादशी की पूजा के बाद देव जगाए जाते हैं, इसका समय शाम 5 बजकर 35 से 6 बजकर 25 मिनट का है। इस मुहूर्त में ही देव उठाने हैं और एकादशी की पूजा भी करनी है।
देवउठनी एकादशी पर देव कैसे उठाते हैं?
देवउठनी एकादशी की पूजा प्रातःकाल या एकादशी तिथि के शुभ मुहूर्त में की जाती है। सबसे पहले स्नान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। फिर तुलसी के पौधे के पास भगवान विष्णु का चित्र या शालिग्राम स्थापित की जाती है। तुलसी के पौधे के पास दीप जलते हैं। एक लकड़ी की छोटी छड़ी या डंडी से जमीन या चौकी पर हल्के से थपकी देते हुए कहते हैं- ठो देवा, जागो देवा, तुलसी विवाह लग्न जवांरा आ गया। या फिर कहा जाता है ऊठो ऊठो गोविंद, ऊठो गोकुलनाथ, ऊठो ऊठो प्रभु परब्रह्म, चार मास निद्रा भई समाप्त। इसके बाद भगवान विष्णु को भोग लगाया जाता है और उनकी आरती की जाती है। फिर तुलसी को जल चढ़ता है। इसके बाद देवउठनी एकादशी की कथा की सुनी जाती है।
