World Lizard Day: घर में छिपकली दिख जाए तो आप क्या करते हैं। शायद तुरंत किसी को आवाज लगाते होंगे - इसे बाहर निकालो! कुछ लोग तो इसे देखते ही कमरे से बाहर भाग जाते हैं। लेकिन कभी आपने इसे थोड़ी देर ध्यान से देखा है?
छिपकली से क्या सीखें, कटी पूंछ ही देती है बड़ा ज्ञान
दीवार पर चुपचाप बैठी यह छिपकली हमें जिंदगी की कई जरूरी बातें सिखा सकती है। इसे पता होता है कि कब रुकना है, कब भागना है और कब अपनी जान बचाने के लिए किसी चीज को छोड़ देना है। यह गिरती भी है, फिर दीवार पर चढ़ जाती है। हालात बदलें तो खुद को भी बदल लेती है।
तो चलिए, 14 अगस्त को मनाए जाने वाले World Lizard Day पर छिपकली से जिंदगी के कुछ काम के सबक सीखते हैं।
कभी-कभी छोड़ देना ही बेहतर होता है
आपने सुना होगा कि खतरा आने पर छिपकली अपनी पूंछ छोड़कर भाग जाती है। अब सोचिए, जिस पूंछ के साथ वह हमेशा रही, जरूरत पड़ने पर उसे भी छोड़ देती है। क्यों? क्योंकि उस समय उसके लिए अपनी जान बचाना ज्यादा जरूरी होता है।
हम भी जिंदगी में कई ऐसी चीजें पकड़े रहते हैं, जो हमें केवल परेशान करती हैं। कोई पुराना झगड़ा, किसी की कही हुई बुरी बात, दर्द देने वाला रिश्ता या अपनी ही कोई खराब आदत। हम सोचते हैं कि इसे कैसे छोड़ दें। लेकिन सच यह है कि हर चीज को बचाकर रखना जरूरी नहीं होता। कभी-कभी आगे बढ़ने के लिए हाथ खाली करने पड़ते हैं।
एक चीज चली गई तो जिंदगी खत्म नहीं हुई
छिपकली की पूंछ कटने के बाद दोबारा डेवलप हो सकती है। नई पूंछ पहले जैसी बिल्कुल नहीं होती, लेकिन छिपकली वहीं बैठकर पुरानी पूंछ का दुख नहीं मनाती। वह अपने काम में लग जाती है।
हमारी जिंदगी में भी बहुत कुछ छूटता है। कभी कोई अपना दूर हो जाता है, कभी नौकरी चली जाती है तो कभी वर्षों से देखा हुआ सपना टूट जाता है। उस समय लगता है कि अब सब खत्म हो गया। लेकिन ऐसा होता नहीं है। हो सकता है आगे की जिंदगी पहले जैसी न हो, मगर नई जरूर हो सकती है। और कई बार यही नई शुरुआत हमें पहले से ज्यादा मजबूत बना देती है।
हर समय भागना जरूरी नहीं है
छिपकली को दीवार पर बिल्कुल शांत बैठे देखा है? कई बार वह इतनी देर तक नहीं हिलती कि लगता है जैसे वहीं चिपक गई हो। मगर असल में वह आसपास की हलचल देख रही होती है। सही मौका मिलते ही वह तुरंत आगे बढ़ जाती है।
हम अक्सर सोचते हैं कि हर समय कुछ न कुछ करते रहना चाहिए। तुरंत फैसला लेना है, तुरंत जवाब देना है और सबसे आगे निकलना है। लेकिन हर बार तेजी दिखाना समझदारी नहीं होती। कभी चुपचाप रुककर चीजों को समझ लेना भी जरूरी है। सही समय पर उठाया गया एक कदम, जल्दबाजी में उठाए गए दस कदमों से बेहतर हो सकता है।
हालात नहीं बदल रहे तो अपना तरीका बदलें
छिपकली कभी धूप में जाती है और कभी ठंडी जगह ढूंढ लेती है। मौसम उसके कहने से नहीं बदलता, इसलिए वह खुद अपनी जगह बदल लेती है।
हमारे साथ भी तो यही होता है। कभी ऑफिस का माहौल हमारे हिसाब से नहीं होता। कभी घर की जिम्मेदारियां अचानक बढ़ जाती हैं। कोई बनाई हुई योजना भी आखिरी समय पर बिगड़ सकती है। ऐसे में हम कुछ देर परेशान हो सकते हैं, लेकिन केवल शिकायत करते रहने से बात नहीं बनेगी। अगर हालात नहीं बदल रहे हैं तो हमें अपना तरीका बदलकर देखना चाहिए।
डरिए, लेकिन डर के सामने रुकिए मत
हल्की-सी आहट होते ही छिपकली सतर्क हो जाती है। उसे खतरा महसूस होता है तो वह सुरक्षित जगह तलाश लेती है। वह यह सोचकर वहीं नहीं बैठी रहती कि जो होगा, देखा जाएगा।
हम भी कई बार अपने डर को नजरअंदाज करने की कोशिश करते हैं। लेकिन डर हमेशा गलत नहीं होता। कभी-कभी वह हमें बताता है कि कहीं कुछ ठीक नहीं है। बस, डर को पहचानने के बाद कोई कदम भी उठाना चाहिए। परेशानी सामने है तो उससे बचने या निपटने का रास्ता खोजिए। केवल डरते रहने से कुछ नहीं बदलेगा।
एक बार गिर गए तो क्या हुआ
छिपकली दीवार पर चढ़ते समय फिसल सकती है। लेकिन वह नीचे बैठकर यह नहीं सोचती कि अब मुझसे दोबारा नहीं होगा। वह फिर अपनी पकड़ बनाती है और ऊपर चढ़ने लगती है।
हम एक बार किसी काम में असफल हो जाएं तो खुद पर ही शक करने लगते हैं। सोचते हैं कि शायद हम इसके लायक नहीं हैं। जबकि हो सकता है कि पहली बार हमारी तैयारी कम रही हो या समय ने साथ न दिया हो। एक बार गिरने का मतलब यह नहीं कि रास्ता खत्म हो गया। थोड़ा संभलिए, अपनी पकड़ मजबूत कीजिए और फिर कोशिश कीजिए।
हर अच्छे काम के बारे में बताना जरूरी नहीं
छिपकली घर के कोनों में घूमकर छोटे-मोटे कीड़े खाती रहती है। वह अपना काम करती है, लेकिन हम उसके इस काम पर शायद ही कभी ध्यान देते हैं।
हमारी जिंदगी में भी हर मेहनत की तुरंत तारीफ नहीं होती। हो सकता है कि आप चुपचाप घर संभाल रहे हों, किसी मुश्किल समय में अपने परिवार के साथ खड़े हों या ऑफिस में बिना कुछ कहे अपनी जिम्मेदारियां पूरी कर रहे हों। लोग ध्यान दें या न दें, आपका काम छोटा नहीं हो जाता। हर अच्छे काम को तालियों की जरूरत नहीं होती।
अगली बार छिपकली दिखे तो यह बात याद रखिएगा
हम यह नहीं कह रहे कि अब छिपकली को देखकर डरना बंद कर दीजिए। डर लगता है तो उससे दूरी जरूर बनाइए। लेकिन अगली बार वह दीवार पर दिखाई दे तो उसकी जिंदगी के ये छोटे-छोटे सबक भी याद कर लीजिएगा।
यह छोटा-सा जीव हमें बताता है कि हर चीज का बोझ लेकर चलना जरूरी नहीं है। कुछ छूट जाए तो जिंदगी रुकती नहीं है। सही समय आने तक शांत रहना चाहिए और गिरने के बाद दोबारा खड़े होने की कोशिश करनी चाहिए। आखिर जिंदगी भी तो इसी का नाम है- बदलना, संभलना और फिर आगे बढ़ जाना।
