सर्दियों के आते ही मोटी जैकेट से लेकर गर्म कपड़े तक निकल आते हैं, लेकिन सिर ढकने से लोग परहेज करते हैं और लोग अपनी सेहत से खिलवाड़ कर बैठते हैं। टोपी पहनना या सिर को कवर करना आज के युवाओं को फैशन में खलल डालने जैसा दिखता है, इसलिए वे अक्सर कानों और चेहरे को खुला छोड़ देते हैं। ऐसे में शरीर के तापमान को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। चिकित्सा विज्ञान और आयुर्वेद दोनों ही मानते हैं कि कानों के जरिए शरीर को लगी ठंड सबसे ज्यादा प्रभावित करती है।
क्यों सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं कान
चिकित्सा विज्ञान और आयुर्वेद दोनों के अनुसार कान शरीर के सबसे संवेदनशील अंगों में से एक हैं। कानों में न तो मांसपेशियां होती हैं और न ही वसा, जो ठंडी हवा से सुरक्षा कर सके। कान की त्वचा के नीचे तंत्रिकाओं का जाल होता है और जब सर्द हवा सीधे इस हिस्से से टकराती है, तो पूरे शरीर का तापमान प्रभावित होता है।
दिमाग और हृदय पर पड़ता है सीधा असर
कानों का सीधा संबंध मस्तिष्क से होता है। ठंडी हवा के संपर्क में आने से मस्तिष्क की नसें उत्तेजित हो सकती हैं, जिससे सिरदर्द, चक्कर और गंभीर स्थिति में बेहोशी तक की समस्या हो सकती है।
इसके अलावा कानों के पीछे मौजूद फेशियल नर्व चेहरे में रक्त संचार को नियंत्रित करती है। तेज ठंडी हवा लगने से इस नर्व में सूजन आ सकती है, जिससे चेहरे के अस्थायी लकवे (फेशियल पैरालिसिस) का खतरा भी रहता है।
आयुर्वेद क्या कहता है
आयुर्वेद के अनुसार कानों का संबंध वात दोष और पाचन तंत्र से भी होता है। कानों पर ठंडी हवा लगने से वात दोष असंतुलित हो सकता है, जिससे गैस, पेट दर्द, मरोड़ और अपच जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
बीपी मरीजों के लिए ज्यादा खतरा
हाई या लो ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। कानों के जरिए शरीर में ठंड प्रवेश करने से नसें सिकुड़ जाती हैं और रक्त वाहिनियों पर दबाव बढ़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर असंतुलित हो सकता है।
सर्दियों में कानों की सुरक्षा के आसान उपाय
- बाहर निकलते समय कानों को टोपी, मफलर या ईयर कवर से जरूर ढकें
- रात में हल्के गुनगुने तेल से कान के पीछे की त्वचा की मालिश करें
- ठंडी हवा के सीधे संपर्क से बचें
- यह उपाय तंत्रिका तंत्र को शांत रखने और शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करते हैं।
फैशन का भी रखें ख्याल
सर्दियों में ऐसी ऊनी कैप पहननी चाहिए जो सिर के साथ कानों को भी अच्छी तरह ढक सके। कैप का रंग जैकेट या स्वेटर से मैच करने पर लुक स्टाइलिश भी लगता है। बहुत टाइट या ढीली कैप की जगह आरामदायक फिट वाली टोपी चुनना बेहतर होता है। बाहर निकलते समय कैप के साथ मफलर पहनने से ठंड से अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है। आप इस मौसम में बीनी, मफलर कैप या फिर बंडाना पहन सकते हैं।
इनपुट - आईएएनएस
