घर में किसी को भूख लगी हो, किसी की दवा का समय हो, बच्चे का स्कूल हो या पति की मीटिंग.. मां को हर छोटी-बड़ी बात याद रहती है। लेकिन अगर उससे पूछा जाए कि आखिरी बार उसने सिर्फ अपने लिए कब कुछ किया था, तो जवाब अक्सर एक मुस्कान या लंबी चुप्पी होती है। मां की दुनिया में परिवार सबसे पहले आता है और वह खुद सबसे आखिर में।
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धीरे-धीरे यही आदत उसकी थकान, तनाव और सेहत पर असर डालने लगती है। आज 24 जुलाई को International Self Care Day हमें यही याद दिलाता है कि खुद का ध्यान रखना स्वार्थ नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। क्योंकि जब मां फिजिकल और मेंटल रूप से हेल्दी रहती है, तभी वह पूरे परिवार की ताकत बन पाती है। देखें कैसे हर मां के लिए रोज के 30 मिनट खुद के नाम करना इतना जरूरी क्यों है।
मां हमेशा सबसे आखिर में खुद को क्यों रखती है?
अधिकतर महिलाओं को बचपन से यही सिखाया जाता है कि पहले परिवार, फिर बाकी सब। यही सोच धीरे-धीरे ऐसी आदत बन जाती है कि वे अपनी नींद, आराम, शौक और यहां तक कि अपनी सेहत को भी टालती रहती हैं। उन्हें लगता है कि 'अभी समय नहीं है', बाद में सब हो जाएगा, जबकि ये समझना जरूरी है कि, यही समय सबसे जरूरी होता है।
30 मिनट का मतलब सिर्फ आराम नहीं होता
सेल्फ-केयर का मतलब महंगे स्पा, शॉपिंग या छुट्टियां नहीं है। रोज के 30 मिनट भी इसके लिए काफी हैं। इस दौरान महिलाएं अपनी पसंद का गाना सुन सकती है, किताब पढ़ सकती है, टहल सकती है, चाय की चुस्की बिना जल्दबाजी के ले सकती है या बस कुछ देर शांत बैठ सकती है। मात्र आधे घंटे का थोड़ा सा समय, दिमाग को रिसेट करने के लिए जरूरी होता है।
खुश महिला से ही है खुश परिवार
जब घर की महिलाएं लगातार थकी रहती है, तो उसका असर पूरे घर के माहौल पर पड़ता है। लेकिन जब वह खुद को थोड़ा समय देती है, तो उसका मूड बेहतर रहता है, धैर्य बढ़ता है और परिवार के साथ बिताया समय भी ज्यादा खुशहाल बन जाता है। मां का अच्छा स्वास्थ्य पूरे परिवार की ताकत होता है। बहुत-सी महिलाएं सिरदर्द, थकान, कमर दर्द या कमजोरी जैसी समस्याओं को सामान्य मानकर नजरअंदाज करती रहती हैं। लेकिन समय पर आराम, सही खाना, पर्याप्त नींद और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना भी सेल्फ-केयर का हिस्सा है।
जरूर ही आज से ही आपको रोज के 30 मिनट कैलेंडर में किसी मीटिंग की तरह तय कर लेने चाहिए। इस समय में कोई घर का काम नहीं, कोई फोन नहीं और कोई जिम्मेदारी नहीं। इस समय में सिर्फ आप और आपका मन होने चाहिए।
