Why fire incidents in flats and homes increased with summers: इन दिनों लगातार तापमान बढ़ने के साथ ही अलर्ट करने वाली जो खबरें आ रही हैं- उनमें घर और फ्लैट्स में आग लगने वाली घटनाएं शामिल हैं। ये इस साल की बात नहीं, हर साल का मामला है। जांच में पाया जाता है कि आग लगने के ये कारण अक्सर हमारी लापरवाही होते हैं जो जानकारी के अभाव में हमसे हो जाती है। यहां जानें कि गर्मी में घरों में आम लगने के प्रमुख कारण क्या हैं, किन बातों पर सावधानी बहुत जरूरी है और जरूरत पड़ने पर किन इमरजेंसी नंबरों पर संपर्क करना चाहिए। और ये भी कि एसी से ये कैसे जुड़े हैं।
गर्मी आते ही क्यों मचने लगता है आग का तांडव
Causes of Fire in Indian Flats: घरों में आग लगने के प्रमुख कारण
बिजली की खराब वायरिंग
पुराने फ्लैट्स या घरों में वायरिंग कुछ साल बाद पुरानी पड़ जाती है। ओवरलोडिंग, घटिया क्वालिटी के तार या सॉकेट्स से स्पार्किंग होती है जो कि आग का कारण बनती है।
एसी से
AC के पार्ट्स जैसे कि कॉम्प्रेसर, मोटर या वायरिंग जब अधिक गर्म हो जाते हैं, तो आग पकड़ सकते हैं। AC में इस्तेमाल होने वाली गैस के लीक होने से भी आग लगने की संभावना रहतीहै। फिल्टर, फैन या कॉइल पर ग्रीस या मिट्टी जमने या इनमें खराब क्वालिटी के इलेक्ट्रिकल पार्ट्स होने से भी आग लगने का खतरा रहता है।
शॉर्ट सर्किट
यह आग लगने का एक बड़ा कारण है। इलेक्ट्रिक उपकरणों का गलत उपयोग या अधिक लोड देने से शॉर्ट सर्किट होता है जिससे आग लगती है।
गैस लीक
जल्दबाजी या लापरवाही में कई बार गैस सिलेंडर या चूल्हे ठीक से बंद नहीं होता। इससे गैस का रिसाव भी कभी-कभी विस्फोट का कारण बनता है।
वेंटिलेशन की कमी
छोटे फ्लैट्स या घरों में में वेंटिलेशन ठीक से नहीं होता। गर्मी में जगह पर लोड बढ़ता है जिससे आग लगती है या किसी और कारण से लगी आग तेजी से फैलती है।
ज्वलनशील पदार्थ रखना
घरों में रखे परफ्यूम, केरोसिन, जैसी चीजें आग को फैलने में मदद करती हैं।
स्मोकिंग और लापरवाही
कुछ लोग घर के अंदर सिगरेट पीते हैं और बुझाए बिना फेंक देते हैं। या लाइटर, माचिस को ठीक से नहीं रखते। इससे भी आग का खतरा बढ़ता है।
सेफ्टी का अभाव
अधिकतर सोसाइटीज और घरों में फायर अलार्म, स्प्रिंकलर और आग बुझाने वाले यंत्र नहीं होते, या खराब स्थिति में होते हैं। इनकी नियमित जांच नहीं होती।
थोड़ी सावधानी करेगी आग से सुरक्षा
- वायरिंग की नियमित जांच कराएं। हर 2–3 साल में घर की पूरी इलेक्ट्रिक वायरिंग प्रोफेशनल से चेक कराएं और जहां जरूरत हो, वहां की तारें बदल दें।
- अच्छे क्वालिटी के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का ही इस्तेमाल करें। साथ ही इन पर बताए गए तरीकों का सावधानी से अमल करें।
- घर में एसी किसी प्रशिक्षित टेक्नीशियन से लगवाएं। ISI मार्क पार्ट्स यूज करें और लगातार एसी चलाने की जगह इसे बीच बीच में बंद कर दें।
- एसी और बाकी एप्लायंस की सर्विस भी समय समय पर कराएं। इससे इनमें हो रहे फाल्ट समय रहते ठीक हो जाएंगे।
- गैस लीक डिटेक्टर लगवाएं। गैस लीक होने पर यह तुरंत अलार्म बजाता है।
- घर में फायर अलार्म और स्मोक डिटेक्टर लगवाएं। ये शुरुआत में ही चेतावनी देकर जान बचाने में मदद करते हैं।
- आग बुझाने वाले यंत्र घर में रखें और इनका पूरा इस्तेमाल सीखें।
- बिल्डिंग के फायर एग्जिट रास्तों को हमेशा साफ और खाली रखें। लोग कई बार इन रास्तों में सामान रखकर रास्ते ब्लॉक कर देते हैं जो बाद में खतरनाक साबित होता है।
- सिगरेट या माचिस का प्रयोग सावधानी से करें, विशेषकर रात को।
- पूजा घर में दीया या अगरबत्ती को ऐसे ही खुला ना छोड़ें। कागज या कपड़े यहां से भी आग पकड़ लेते हैं।
- बच्चों को माचिस, लाइटर आदि से दूर रखें। अनजाने में हुई गलती बड़े हादसों की वजह बनती है।
इमरजेंसी नंबर रखें याद
जागरूकता फैलाने से बचेगी जान
- ऑफिस, सोसाइटी स्तर पर लोगों को आग लगने के कारणों और ऐसा होने पर क्या किया जाए - पर जागरूक करना चाहिए।
- बिल्डिंग के फायर NOC को समय-समय पर रिन्यू करना चाहिए।
- फायर ब्रिगेड से समय-समय पर निरीक्षण कराया जाए।
- सोसाइटी में आग बुझाने वाले यंत्रों की नियमित जांच और रखरखाव होना चाहिए।
इसके अलावा, बच्चों को भी आग लगने के कारण और ऐसी आपदा की स्थिति में क्या करना चाहिए - जैसी बातों पर अलर्ट करना चाहिए।
