जब अपना पसंदीदा अचार ना देख भड़क गए थे फिराक गोरखपुरी, पत्नी को वापस भेज दिया था मायके

फिराक गोरखपुरी की पत्नी का नाम किशोरी देवी थी। फिराक चाहते थे कि वह किसी पढ़ी लिखी लड़की से शादी करें। लेकिन उनके ही एक रिश्तेदार ने उनकी शादी अनपढ़ किशोरी से करा दी। फिराक बुरी तरह से टूट गए। फिराक ने शादी तो नहीं तोड़ी लेकिन किशोरी संग कभी दिल नहीं जोड़ पाए।

Firaq Gorakhpuri: फ़िराक़ गोरखपुरी सिर्फ एक नाम नहीं थे। उन्हें लोग हिंदुस्तानी तहजीब का प्रतीक मानते थे। अधूरे इश्क वाले फिराक ऐसे मुकम्मल शायर थे जिन्होंने उर्दू शायरी की फिज़ा में नई रोशनी भरी, नई सोच दी और एक पूरा दौर अपने अंदाज़ से संवार दिया। फिराक का जन्म रघुपति सहाय नाम से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुआ था। उन्होंने अंग्रेजी में एम.ए. किया और आई.सी.एस. भी चुने गए, लेकिन महात्मा गांधी के आह्वान पर आज़ादी की लड़ाई में शामिल होकर नौकरी छोड़ दी।

Firaq Achaar

फिराक गोरखपुरी

शायरी की मांग के सिंदूर थे फिराक

फिराक की शायरी में प्रेम, सौंदर्य, विरह और इंसानी जज्बातों की गहराई देखने को मिलती है। फिराक ने उर्दू ग़ज़ल को एक नई शैली और सौंदर्यबोध दिया। उनकी भाषा में एक खास किस्म की नर्मी और हिंदुस्तानी मिट्टी की खुशबू है। वह फिराक ही थे जिन्होंने उर्दू को हिंदू-मुस्लिम एकता का पुल बनाया। फ़िराक़ के बारे में जोश मलीहाबादी ने अपनी किताब ‘यादों की बारात’ में तो यहां तक लिखा है कि वे शायरी की मांग का संदल और उर्दू ज़ुबान की आबरू हैं।

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