Farshi Vs Patiala Salwar Design: साड़ी के बाद अगर कोई ट्रेडिशनल इंडियन अटायर दुनिया भर में डेली वियर के हिसाब से पहना जाता है, उसमें बेशक ही सलवार कुर्ती का नाम सबसे पहले ही आएगा। सिंपल और सुंदर लुक के लिए महिलाएं हर ओकेजन के लिए खास सलवार कमीज बनवाती हैं, जो लुक में भी शानदार होता है और ईजी टू कैरी भी। भारतीय फैशन के हर दौर में अलग अलग तरह के सूट-सलवार ट्रेंड में रहे हैं, और इन दिनों ऐसा ही छप्पर फाड़ ट्रेंड ट्रेडिशनल फारसी सलवार का चल रहा है। इंडिया से लेकर पाकिस्तान की लड़कियां वाकई इस सलवार डिजाइन की फैन हैं, और अब हर कोई यही सलवार पहन रहा है। हालांकि फारसी सलवार बहुत हद तक पटियाला सलवार जैसी ही लगती है, ऐसे में यहां देखें आखिर दोनों में अंतर क्या होता है।
Difference Between Farshi and Patiala Salwar
Difference Between Farshi And Patiala Salwar
फारसी और पटियाला सलवार दोनों ही खासतौर से पंजाबी और पाकिस्तान वाले क्षेत्र में ज्यादा पहनी जाती है। सालों पहले भी फारसी सलवार का ट्रेंड चला था, और अब फैशन रीबूट में ये सलवार डिजाइन फिर से लोगों द्वारा पसंद की जा रही है। हालांकि सेम दिखने वाली इन सलवारों में काफी अंतर होता है -
फारसी सलवार: सादगी में शान
फारसी सलवार, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इसकी उत्पत्ति फारस (ईरान) से हुई है। यह सलवार सीधे कट और टेपर्ड डिजाइन के लिए जाना जाता है, जो एंकल के भी नीचे तक जाता है। इसकी सादगी और स्टाइलिश लुक इसे फॉर्मल और प्रोफेशनल मौकों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनाती है। लंबे कुर्ते के साथ पहने जाने वाली फारसी सलवार मॉडर्न और ट्रेडिशनल दोनों तरह के लुक को पूरा करती है। हालांकि शॉर्ट कुर्तों के साथ भी इस लंबी लेंथ वाली सलवार का लुक कमाल आता है।
पटियाला सलवार: रॉयल्टी और आराम
पटियाला सलवार पहनने का चलन पंजाब के शाही शहर पटियाला से शुरु हुआ था। यह सलवार अपने भारी प्लीट्स और ढीले फिट के लिए मशहूर है, जो इसे बेहद आरामदायक और अट्रैक्टिव बनाता है। पटियाला सलवार को आमतौर पर छोटे कुर्ते के साथ पहना जाता है, जो इसके प्लीट्स को और भी खास बनाता है। यह त्योहारों और कैजुअल मौकों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है और पंजाबी संस्कृति की रंगीन छवि को दर्शाता है।
फारसी और पटियाला सलवार में मुख्य अंतर
फारसी सलवार और पटियाला सलवार दोनों ही आराम और स्टाइल के लिए जाने जाते हैं, लेकिन फारसी सलवार में कोई भी प्लीट्स नहीं होती है। ये सलवार एकदम स्ट्रेट कट फिट वाली होती है, जिसकी लेंथ आमतौर पर आपके एंकल से नीचे ही जाती है। वहीं पटियाला सलवावर में घेर और प्लीट्स होती हैं, कई लोग स्ट्रेट पटियाला भी पहना करते हैं, लेकिन उसमें मुख्य अंतर ये होता है कि, पटियाला एंकल से टाइट रहती है जिससे बैलून जैसा लुक आता है। हालांकि आप फारसी सलवार का चुनाव करें या पटियाला सलवार का, दोनों ही भारतीय फैशन की समृद्ध परंपरा को दर्शाते हैं और हर वार्डरोब के लिए एक खास विकल्प प्रदान करते हैं।
