Chikankari Vs Lucknowi Embroidery Design: उत्तर प्रदेश में अगर बनारसी के बाद कोई कपड़ा और एम्ब्रॉयडरी सबसे ज्यादा मशहूर है तो वो बेशक ही लखनऊ की शान मानी जाने वाली चिकनकारी और लखनवी कढ़ाई है। चिकनकारी और लखनवी कढ़ाई भारतीय हैंडलूम के दो प्रसिद्ध रूप हैं, जो अपने अपने अंदाज में बहुत ही ज्यादा खास है। हालांकि अक्सर ही लोग चिकनकारी और लखनवी कढ़ाई के बीच में अंतर स्पष्ट नहीं कर पाते हैं। लेकिन बता दें कि, ये दोनों कुछ हद तक एक जैसे दिख सकते हैं, लेकिन दोनों की एम्ब्रॉयडरीज में काफी अंतर होता है। दोनों ही लखनऊ की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा हैं, और अपनी खूबसूरती और बारीकी से हर किसी के दिल में घर कर लिया है। यहां देखें कि आखिर इन दोनों कढ़ाई शैलियों में क्या अंतर होता है और क्या खास है।
Difference Between Lucknowi And Chikankari Fabric Design
Difference Between Chikankari And Lucknowi Embroidery
चिकनकारी और लखनवी दोनों ही एम्ब्रॉयडरीज उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की प्रसिद्ध कढ़ाई शैलियां हैं। ये दोनों ही तरह की कढ़ाई मुख्यतौर पर कुर्तियों पर की जाती है। हालांकि इन दिनों इस तरह की एम्ब्रॉयडरी वाली साड़ियां भी बेहद मशहूर हैं। न केवल लड़कियां बल्कि लड़के भी इस कढ़ाई के कपड़ों को शान से पहनते हैं और ये अब एक फैशन स्टेटमेंट बन चुका है। देखें दोनों में मुख्य अंतर क्या है -चिकनकारी: नाजुकता का प्रतीक
चिकनकारी एक ट्रेडिशनल इंडियन कढ़ाई शैली है, जिसकी उत्पत्ति मुगलकालीन लखनऊ में हुई थी। यह अपनी बारीक नीडल वर्क और हल्के रंगों के लिए प्रसिद्ध है। चिकनकारी में मुख्यतः सफेद या पेस्टल रंग के कपड़ों पर सफेद धागे से कढ़ाई की जाती है। इसमें फूल-पत्तियों, जालीदार डिजाइन और ज्यामितीय पैटर्न का उपयोग होता है।
लखनवी कढ़ाई: शाही ठाठ का प्रतीक
लखनवी कढ़ाई, जिसे कभी-कभी 'लखनवी जाली काम' भी कहा जाता है, चिकनकारी से अलग है। यह अधिक भव्य और गहरी कढ़ाई वाली शैली होती है, जिसमें रेशम, जरी और मोती का उपयोग किया जाता है। बता दें कि लखनवी कढ़ाई में गहरे रंगों के साथ-साथ ज़री वर्क और मीनाकारी भी देखने को मिलती है, जो इसे चिकनकारी से अलग बनाता है। कई लोग इस कला को चिकनकारी की तुलना में और शानदार मानते हैं। हालांकि दोनों ही अपनी अपनी जगहों पर कमाल लुक देती हैं।
चिकनकारी और लखनवी कढ़ाई में मुख्य अंतर
डिजाइन: चिकनकारी में सूक्ष्म और हल्के डिजाइन होते हैं, जबकि लखनवी कढ़ाई में भव्य और गहरे पैटर्न।
रंग: चिकनकारी हल्के रंगों पर की जाती है, जबकि लखनवी कढ़ाई गहरे और चमकीले रंगों में उपलब्ध होती है।
सामग्री: चिकनकारी में सूती या मलमल के कपड़े पर सफेद धागे का उपयोग होता है, जबकि लखनवी कढ़ाई में रेशम, जरी और मोती लगे होते हैं।
दोनों ही तरह की एम्ब्रॉयडरी में यही अंतर होता है। हालांकि दोनों ही भारतीय हैंडलूम तो उत्तर प्रदेश के ट्रेडिशनल वियर की शान है। वहीं चिकनकारी और लखनवी एम्ब्रॉयडरी दोनों ही भारतीय फैशन की समृद्ध परंपरा को दर्शाते हैं और हर वार्डरोब के लिए एक खास विकल्प प्रदान करते हैं।
