What is Margarine, Analogue Paneer: बाजार में कई ऐसी चीजें मिलती हैं जो देखने में बिल्कुल शुद्ध और नेचुरल लगती हैं, लेकिन उनको बनाने में इस्तेमाल की गई असली सामग्री अलग हो सकती है। घी, मक्खन और पनीर का नाम सुनते ही आमतौर पर हमारे दिमाग में उनकी एक तय तस्वीर बन जाती है। लेकिन बाजार में इनके जैसे दिखने वाले कुछ दूसरे उत्पाद भी मिलते हैं, जिनकी सामग्री अलग हो सकती है। यही वजह है कि इन दिनों मार्जरीन और एनालॉग पनीर जैसे शब्द चर्चा में हैं।
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हाल ही में हरियाणा में इन उत्पादों पर एक साल का बैन लगा दिया है। बता दें कि, मार्जरीन को अक्सर मक्खन के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, जबकि एनालॉग पनीर पनीर जैसा दिखने वाला गैर-डेयरी विकल्प हो सकता है। इसी तरह के प्रोडक्ट्स को पूजा के घी या दीया के घी के रूप में भी यूज किया जाता है। विस्तार में जानिए आखिर ये मार्जरीन क्या होता है और ये सामान्य डेयरी उत्पादों से कैसे अलग हैं। साथ ही ग्राहकों को खरीदारी करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
मार्जरीन क्या होता है
सीधी भाषा में कहें तो मार्जरीन मक्खन का एक विकल्प है। इसे आमतौर पर वनस्पति तेल या वनस्पति फैट से तैयार किया जाता है। इसका स्वाद और इस्तेमाल मक्खन जैसा हो सकता है, लेकिन दोनों एक ही चीज नहीं हैं। इसलिए मार्जरीन का इस्तेमाल होना अपने आप में किसी गड़बड़ी का मतलब नहीं है। असली सवाल यह है कि उसे ग्राहक के सामने किस नाम से पेश किया जा रहा है।
पूजा वाला घी
‘पूजा घी’, ‘दीया घी’ या ‘हवन घी’ जैसे नाम सुनकर कई लोगों को लगता है कि यह सामान्य खाने वाला घी ही होगा। लेकिन किसी उत्पाद पर घी लिखा होने भर से वह अपने आप मानक वाला खाद्य घी नहीं बन जाता। हरियाणा के फैसले में ऐसे उत्पादों को लेकर भी नियमों का पालन करने की बात कही गई है। मतलब साफ है, नाम से ज्यादा जरूरी है कि उत्पाद वास्तव में क्या है और वह तय मानकों पर खरा उतरता है या नहीं।
एनालॉग पनीर क्या होता है
अब पनीर की बात करें तो एनालॉग पनीर को आसान शब्दों में पनीर जैसा दिखने वाला ऐसा विकल्प समझ सकते हैं जिसमें दूध से मिलने वाले कुछ प्रमुख हिस्सों की जगह गैर-डेयरी सामग्री जैसे स्टार्च, वेजिटेबल तेल इस्तेमाल की जा सकती है। यानी प्लेट में दिखने वाला टुकड़ा पनीर जैसा हो सकता है, लेकिन उसकी सामग्री पारंपरिक दूध वाले पनीर से अलग हो सकती है।
हरियाणा सरकार ने लगाया बैन
हरियाणा सरकार ने मार्जरीन को मक्खन या ‘मक्खन’ के नाम से बेचने और एनालॉग पनीर के इस्तेमाल तथा बिक्री पर एक साल की रोक लगाई है। ‘पूजा के लिए घी’, ‘दीये का घी’ और ऐसे दूसरे नामों से बिकने वाले उत्पादों को लेकर भी तय मानकों का पालन जरूरी किया गया है। सरकार की कार्रवाई के पीछे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और लोगों को सही जानकारी देने की चिंता बताई गई है।
ऐसे में अगर आप भी अगली बार बाजार में घी, मक्खन या पनीर खरीदें तो सिर्फ सामने लिखे बड़े नाम पर भरोसा न करें। लेबल पर सामग्री, उत्पाद का प्रकार और दूसरी जरूरी जानकारी भी पढ़ें। और अगर किसी होटल या रेस्तरां में पनीर की कोई डिश खा रहे हैं, तो जरूरत पड़ने पर पूछ सकते हैं कि उसमें किस तरह का पनीर इस्तेमाल हुआ है।
