शब्द जो आदर बन गए: क्या होता है Ladies First का मतलब, कैसे शुरू हुआ लेडीज फर्स्ट का चलन

Ladies First Trend: समय के साथ समाज बदला। समाज बदला तो महिलाओं की भूमिका भी बदली। अब महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के बराबर खड़ी हैं। ऐसे में लेडीज़ फर्स्ट का मतलब भी बदल गया है। अब ये सिर्फ शिष्टाचार नहीं, बल्कि एक ऐसी आदत बन गई है जिसका कोई बड़ा मतलब नहीं रहा।

Ladies First Trend in Hindi: हम सबने लोगों को 'लेडीज फर्स्ट' कहते सुना या देखा होगा। अकसर लोग सार्वजनिक जगहों पर लेडीज फर्स्ट कहते हुए महिलाओं को प्राथमिकता देते हैं। दुनियाभर के तमाम देशों में यह चलन आम है। यह चलन फिल्मों, किताबों और कहानियों में भी खूब दिखता है। राजकुमार का राजकुमारी के लिए दरवाजा खोलना या किसी नायक का अपनी प्रेमिका को पहले कुर्सी पर बैठाना..ये सब दृश्य हमारे जेहन में आदर्श बन चुके हैं। ये शिष्टाचार के साथ-साथ रोमांटिकता का भी प्रतीक बन गया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस चलन की शुरुआत कहां से हुई? आखिर कैसे विकसित हुई लेडीज फर्स्ट की सामाजिक सोच?

1

कैसे शुरू हुआ लेडीज फर्स्ट का ट्रेंड (How Ladies First Start)

कैसे आया लेडीज फर्स्ट का ट्रेंड? (Photo: Pexels)

शुरुआत कहां से हुई? (History Of Ladies First)

Ladies First की परंपरा की शुरुआत मानी जाती है यूरोप से, खासतौर पर इटली और इंग्लैंड जैसे देशों से। राजा-महाराजाओं और शूरवीर यानी नाइट्स के समय में महिलाओं को खास लेकिन नाजुक समझा जाता था। वहां पुरुषों को स‍िखाया गया क‍ि वे महिलाओं के लिए दरवाजा खोलें, उन्हें आगे चलने दें या बैठने के लिए कुर्सी दें। ये उन्‍हें सम्‍मान और प्‍यार देने का खास तरीका था ना कि कमजोर महसूस कराने का। उसी दौर में यह चलन शुरू हुआ कि महिलाएं सबसे पहले कमरे में जाएं, सबसे पहले भोजन करें या उन्हें सबसे पहले सम्मान मिले।

End of Feed