शहरों में तेजी से बढ़ता हेल्थ रिस्क - स्ट्रेस, स्क्रीन और सिटिंग जॉब से बढ़ रही बीमारियां, पढ़ें डॉक्टर की सलाह

Urban Lifestyle Health Risk: आज की शहरी लाइफस्टाइल में बढ़ता स्ट्रेस, घंटों स्क्रीन देखना और लंबे समय तक बैठकर काम करना कई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे रहा है। एक्सपर्ट के अनुसार इसका असर नींद, मानसिक स्वास्थ्य और शरीर की ऊर्जा पर साफ दिखता है। जानिए इस पर क्या है डॉक्टर की सलाह और समझें कैसे छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके इन हेल्थ रिस्क से बचा जा सकता है।

Urban Lifestyle Health Risk: आज की शहरी जिंदगी देखने में जितनी आसान और आरामदायक लगती है, उतनी ही चुपचाप हमारी सेहत को नुकसान भी पहुंचा रही है। सुबह उठते ही मोबाइल देखना, पूरे दिन लैपटॉप पर काम करना और घंटों एक ही जगह बैठे रहना अब हमारी दिनचर्या बन चुका है। धीरे-धीरे यह आदतें शरीर और दिमाग दोनों को प्रभावित करती हैं। मारेन्गो एशिया हॉस्पिटल्स, गुरुग्राम की सीनियर कंसल्टेंट साइकोलॉजी डॉ. मुनिया भट्टाचार्य के मुताबिक लगातार तनाव, ज्यादा स्क्रीन टाइम और फिजिकल एक्टिविटी की कमी से नींद खराब होने लगती है, थकान बढ़ती है और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। समय रहते इन आदतों पर ध्यान देना जरूरी है।

खराब लाइफस्टाइल बन रहा शहरी जीवन पर बड़ा संकट

खराब लाइफस्टाइल बन रहा शहरी जीवन पर बड़ा संकट (PC- AI)

हर समय एक्टिव दिमाग बन रहा तनाव की वजह

आजकल ज्यादातर लोगों का दिन मोबाइल स्क्रीन से शुरू होता है और उसी पर खत्म भी हो जाता है। काम का दबाव, लगातार मीटिंग्स और हर समय ऑनलाइन रहने की आदत दिमाग को आराम नहीं करने देती। डॉ. मुनिया भट्टाचार्य बताती हैं कि जब दिमाग को ब्रेक नहीं मिलता, तो तनाव धीरे-धीरे बढ़ने लगता है। लंबे समय तक ऐसा चलने पर व्यक्ति मानसिक रूप से थका हुआ महसूस करने लगता है और उसका असर मूड पर भी दिखने लगता है।

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